योनि शूल के लक्षण और निदान / Yoni Shul Problem in hindi

योनि शूल के लक्षण और निदान

कई कारणों से योनि में शूल की विकृति हो सकती है। किसी रोग या चोट लग जाने पर योनि में शूल होने लगता है। शीत ऋतु में अधिक शीतल वातावरण व अधिक शीतल खाद्य-पदार्थों के सेवन से वायु कुपित होने पर योनि शूल की उत्पत्ति हो सकती है। योनि शूल की विकृति योनि के भीतर या बाहर की ओर फुसियां होने, किसी जख्म के कारण योनि में शोथ होने से हो सकती है। प्राकृतिक रूप से योनि के संकीर्ण होने पर सहवास के समय अधिक शूल होता है।

योनि शूल की उत्पत्ति कैसे होती है?

योनि शूल की उत्पत्ति सबसे अधिक चोट लगने से होती है। यह चोट किसी तरह भी लग सकती है। सीढ़ियों से गिरने या गुसलखाने में फिसल जाने पर भी चोट लग सकती है। कुछ नवयुवतियां भीगे वस्त्रों में देर तक कपड़े धोती रहती हैं। कुछ नवयुवतियां नंगे पांव फर्श साफ करती हैं या नंगे पांव गीले फर्श पर रसोईघर में काम करती रहती हैं। सर्दी के प्रभाव से योनि शूल की उत्पत्ति हो सकती है। योनि में गंदगी के कारण खुजली हो सकती है। दूसरे के आंतरिक वस्त्र, तौलिया आदि इस्तेमाल करने से योनि में खुजली हो जाती है। जब खुजली होती है तो जोर से खुजलाने पर नाखून लग जाने से जख्म हो जाता है।

योनि के भीतर की त्वचा बहुत कोमल होती है। नाखूनों से बने जख्म में शोथ होने से अधिक पीड़ा होती है। योनि के बाहर-भीतर फुसियां होने पर तीव्र शूल हो सकता है। योनि की संकीर्णता के कारण ‘सहवास’ के समय बहुत पीड़ा होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव के बाद सूतिका रोग में जीवाणुओं के संक्रमण के कारण योनि में शोथ होने शूल होने लगता है। सूतिका रोग में योनि से रक्तस्राव के साथ तीव्र शूल भी होता है | योनिभ्रंश अर्थात योनि के उलट जाने पर भी तीव्र शूल होता है। तो योनि में शूल होने लगता है|

गुणकारी घरेलु नुस्खे ।

1. गोक्षर, रास्ना और वसा को 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर कूट-पीसकर कल्क बनाकर दूध में मिलाकर सेवन करने से योनि शूल नष्ट होता है।

2. सेंधा नमक, देवदारू, कूठ, कण्टकारी और तगर सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीसकर 200 ग्राम तेल मे पकाकर, छानकर उस तेल को रुई में भिगोकर योनि में रखने से योनि शूल नष्ट होता है।

3. पिप्पली, काली मिर्च, उड़द, सोये, कूठ और सेंधा नमक सभी वस्तुएं 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीसकर जल के साथ बत्ती बनाकर योनि में रखने से योनि शूल नष्ट होता है।

4. सोंठ 10 ग्राम को 300 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं, फिर उस क्वाथ को छानकर 20 ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से ऋतुस्राव की विकृति से उत्पन्न योनि शूल नष्ट होता है।

5. उलट कंबल की जड़ का रस 5 ग्राम मात्रा में 10 ग्राम शक्कर के साथ सेवन करने से योनि शूल नष्ट होता है|

6. अपामार्ग की जड़ और पुनर्नवा की जड़ को 5-5 ग्राम मात्रा में बारीक पीसकर योनि में लेप करने से योनि शूल नष्ट होता है।

7. योनि में फुसियां होने पर नीम के पत्तों को जल में उबालकर, छानकर योनि को साफ करने से फुसियों के नष्ट होने पर शूल की विकृति नष्ट होती है।

8. योनि में खुजली होने पर नाखूनों से बने जख्म होने पर नीम की छाल को जल के साथ घिसकर लेप करने से बहुत जल्दी शूल से मुक्ति मिलती है।

9. योनि में शोथ होने पर अधिक शूल हो रहा हो तो डिटोल आदि जीवाणुनाशक औषधियों को जल में घोलकर योनि को स्वच्छ करना चाहिए।

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