बेल के फ़ायदे/wood apple benefits in hindi

बेल फल का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है क्योंकि शिव की पूजा में बेलपत्र और फल अर्पित किए जाते हैं शिव पर्वतीय अंचल के देवता हैं और बेल उनका परम प्रिय फल है बेल के वृक्ष देश के प्रायः सभी प्रदेशों में पाए जाते हैं बेल का पेड़ 9 से 10 मीटर ऊंचे होते हैं पेड़ कि शाखाएं सीधी होती हैं लेकिन इन शाखाओं पर कांटे अवश्य होते हैं बेल के पत्तों से भीनी भीनी सुगंध आती है बेल के पुष्प श्वेत वर्ण के होते हैं बेल का फल भी प्रारंभ में हरे रंग का होता है लेकिन पकने पर पीले रंग में परिवर्तित हो जाता है|

बेल वृक्ष के पत्ते, फूल, छाल, जड़ व फल सभी रोग विकारों को नष्ट करने में उपयोग किए जाते हैं बेल के पत्ते कफ, वात, और फूल को नष्ट करते हैं जबकि बेल के पुष्प अतिसार और बमन विकृति को नष्ट करते हैं बेल के बीजों का तेल निकालकर उपयोग किया जाता है बेल के पके हुए फल पोस्टिक स्निग्ध दीपन संकोच और अस्त्रों को शक्ति प्रदान करता है इसके सेवन से सूजन ज्वर कफ वक्र विकृत नष्ट होती है इसके सेवन से आमवात और अतिसार में बहुत लाभ होता है बेल का रस स्वादिष्ट कुछ कसोला मधुर वचन और सुपौल से होता है बेल रस के सेवन से सूजन सीघ नष्ट होती है

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. बेल के पत्तों को थोड़ा सा कूटकर कपड़े में बांधकर उनको निचोड़ कर रस निकालें प्रतिदिन 10 ग्राम मात्रा में बेल के पत्तों का रस सेवन करने से मधुमेह रोग में शर्करा का निष्कासन कम होने लगता है।

2. बेल का पका हुआ फल खाने से बुखार नष्ट होता है बेल की जड़ का क्वाथ बनाकर सुबह-शाम पीने से रुका हुआ बुखार जल्दी से खत्म हो जाता है।

3. बेल के कच्चे फल को गर्म राख में भूनकर फिर उसको कूट पीसकर रस निकालें इस रस में मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से आव विकृत नष्ट होती है।

4. बेल के गूदे को गुड़ के साथ सेवन करने से रक्तातीसार की विकृति नष्ट होती है|

5.बेल के गूदे को पीसकर चावल के पानी के साथ सेवन करने से गर्भावस्था में बमन बंद होता है |

6.बेल के फल का शरबत पीने से ग्रीष्म ऋतु में लू के प्रकोप से सुरक्षा होती है |

7.बेल की जड़ को जल के साथ घिसकर मस्तक पर लेप करने से सिर दर्द नष्ट होता है |

8.अर्श रोग में रक्त स्त्राव होने पर बेल के 3 ग्राम चूर्ण में मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार जल के साथ सेवन करने से बहुत लाभ होता है |

9.बेल का मुरब्बा सेवन करने से अतिसार में बहुत लाभ होता है बेल का मुरब्बा प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय और आंतों की उस्द्र्ता नष्ट होती है|

10.कोष्ठबंधता में बेल के पत्तों का रस और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से कोष्ठबंधता नष्ट होती है |

11.हृदय रोग से पीड़ित स्त्री पुरुषों को बेल के पत्तों के रस में गाय का घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बहुत लाभ होता है |

12.बेल के पत्तों को थोड़ी सी काली मिर्च के साथ पीसकर , मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है |

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