तुण्डिका शोथ ( टॉन्सिल ) | Tonsils symptoms in hindi

ऐलोपैथी चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार तुण्डिका शोथ अर्थात टांसिल की विकृति स्टेप्टोकोकस जीवाणुओं के कारण होती है। इस रोग के जीवाणु खाने-पीने की दूषित चीजों के साथ स्वस्थ बच्चों तक पहुंचकर उनके गले में टांसिलों में शोथ (सूजन) की उत्पत्ति करते हैं। तुण्डिका शोथ होने पर बच्चों को खाने में बहुत पीड़ा होती है। दुध और जल पीने में भी बहुत पीड़ा होती है। शोथ के कारण ग्रसनिका और तालू की स्लेष्मिक कला भी अधिक लाल हो जाती है। यदि इसकी चिकित्सा में विलंब किया जाए तो टांसिलों से पूयस्राव भी होने लगता है। जब प्पूयस्राव भीतर ही एकत्र होता है तो टांसिलों पर श्वेत रंग की श्लैष्मिक कला (झिल्ली) बन जाती है। अधिक शोथ होने पर रोक भी पीड़ा होने लगती है। कान के नीचे भी शोथ के लक्षण दिखाई देते है।
तण्डिका शोथ की विकृति होने पर जीभ पर मैल-सी जमने लगती है। रोगी के मुह से दुर्गन्ध आने लगती है। कुछ लड़के-लड़कियों को तुण्डिका शोथ से पहले (जुकाम) भी हो जाता है। सिर में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। इस रोगी की आवाज बैठ जाती है। रोगी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बोल पाता। रोगी ज्वर से भी पीड़ित हो सकता है |

गुणकारी घरेलु नुस्खे

1.लोबिया 100 ग्राम जल में उबालकर हल्का गर्म-गर्म पीने से तुण्डिका शोथ (टांसिलों) में बहुत लाभ होता है। पीड़ा और शोथ नष्ट होता है।

2.चमेली के 100 ग्राम पत्ते 300 ग्राम जल में उबालकर गरारे करने से टांसिलों की विकृति नष्ट होती है।

3.काली जीरी 3 ग्राम और गेरू 2 ग्राम दोनों को जल के साथ पीसकर गले पर लेप करने से शोथ और पीड़ा शांत होती है |

4.आक (मदार) के 10 ग्राम दूध में 3 ग्राम सेंधा नमक पीसकर गले पर लेप करने से शोथ का प्रकोप नष्ट होता है।

5.घी में सेंधा नमक मिलाकर गले पर ऊपर से लेप करें।

6.शहतूत के 100 ग्राम पत्तों को 300 ग्राम जल में उबालकर गरारे करें।

7.अनन्नास का रस पीने से टांसिलों का शोथ प्रकोप नष्ट होता है।

8.उष्ण जल में फिटकरी डालकर गरारे करने से टांसिलों की विकृति नष्ट होती है।

9.फिटकरी को भूनकर और नीले थोथे को भूनकर ग्लिसरीन में मिलाकर रखें। फिर स्वच्छ रुई और फुहेरी बनाकर लगाने और लार टपकाने से टांसिलों का शोथ नष्ट होता है। फिटकरी और नीला थोथा 5-5 ग्राम और ग्लिसरीन 25 ग्राम लें।

10.एरंड, शहतूत की पत्तियां और निर्गुण्डी तीनों को 10-10 ग्राम लेकर 400 ग्राम जल में उबालकर उसकी भाप लगाने से शोथ नष्ट होता है।

11.मसूर की दाल 100 ग्राम जल में उबालकर पीस लें, फिर इसका गले पर लप करने, हल्का-हल्का सेंकने से शोथ नष्ट होता है।

12.हल्के गर्म जल में थोड़ा सा नमक या पोटाशियम परमैगनेट मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे करने से शोथ की विकृति नष्ट होती है।

13.दालचीनी को पीसकर उसमें मधु मिलाकर दिन में दो बार चाटकर खाने से तुण्डिका शोथ की विकृति नष्ट होती है।
शहतूत के कोमल पत्तों का रस निकालकर 3 ग्राम रस गर्म जल में मिलाकर गण्डूष (गरारे) करने से टांसिल रोग नष्ट होता है।

14.यदि टॉन्सिल बढ़ गए हों तो मेहंदी के पत्ते जलाकर काढ़ा बना लें और उससे गरारे करें। तत्काल लाभ होगा।

15.टॉन्सिल बढ़ जाने पर सफेद नमक, हल्दी और बायविडंग, तीनों को अलग-अलग पीसकर शीशियों में भरकर रख लें। जब तकलीफ हो तो एक गिलास गरम पानी में, आधा-आधा चम्मच चूर्ण डालकर घोल बना लें और सुबह-शाम गरारे करें, टॉन्सिल ठीक हो जाएगा।

चेतावनी:- तुण्डिका शोथ की विकृति होने पर रोगी को कोई शीतल खाद्य-पदार्थ व शीतल पेय का सेवन नहीं करना चाहिए। घी, तेल-मिर्च व उष्ण मसालों से बने खाद्य-पदार्थ बिल्कुल नहीं खाने चाहिए। खट्टे-मीठे व चटपटे खाद्य-पदार्थ बहुत हानि पहुंचाते हैं। रोगी को तरल खाद्य-पदार्थ दलिया, खिचड़ी आदि लेने चाहिए।

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