सुडौल, पुष्ट स्तन के कारण लक्षण और उपचार : Sudaila Pushta Stan Ke Karan Lakshan Aur Upchar

सुडौल पुष्ट स्तन के कारण व लक्षण

स्त्री के शरीर में पुष्ट, उन्नत और सुडौल स्तान जहां उनके उत्तम स्वास्थ्य के परिचायक होते हैं वहीं नारीत्व की गरिमा और सुंदरता में भी द्विगुणित वृद्धि करने वाले होते हैं। जिन युवतियों के स्तनों की बनावट सुडौल और पुष्ट नहीं होती, वे हीनता का अनुभव करती है। यह सभी युवतियों व स्त्रियों की कामना होती है कि उनके स्तन भरपूर उभार लिए, पुष्ट व कमनीय हो।

स्तनों का ढीलापन प्रायः अज्ञानता व अतिकामुक प्रकृति का दुष्परिणाम है। अल्हड़  उम्र में भोलेपन, जिज्ञासु भाव और मानसिक आनंद के  वशीभूत होकर कुसंगति में पड़कर किशोरियां स्तनों से छेड़छाड़ व खिलवाड़ करने लगती हैं जिससे उनके स्तन जरूरत से ज्यादा भारी या ढीले हो जाते हैं।

उपचार

विशेष नुस्खे – अरंडी के पत्ते, गंगरेन की जड़, ग्वारपाठे की जड़, गोरखमुंडी तथा छोटी कटेरी 50 – 50 ग्राम, इंद्रायण की जड़ 20 ग्राम, पीपल के अंतरछाल, केले का पंचांग, सहजन के पत्ते, अनार कूट और कनेर की जड़, खंबारी की अन्तर छाल को सौ – सौ ग्राम 30 ग्राम असगंध को कूट कर पांच लीटर पानी में काढा़ बना लें। जब एक चौथाई भाग शेष रह जाए तब इसमें 250 – 250 ग्राम सरसों या तिल का तेल डालकर इसे इतना उबालें कि सारा पानी नष्ट हो जाए। जब सिर्फ तेल बचे तब काढ़े को उतारकर ठंडा कर लें तथा इसमें 15 ग्राम शुद्ध कपूर पीसकर डाल दें। इसकी प्रतिदिन स्तनो पर हल्की हल्की मालिश करें। यह बेहद करागर उपाय हैं।

मालिश –  स्तनों को पुष्ट और सुडौल रखने के लिए मालिश करना भी काफी हितकारी होता है। यदि 17 से 19 वर्ष की आयु तक भी स्तन अविकसित रहेंं या ज्यादा भारी हो या लटके हुए हो तो जैतून के तेल को दोनों हाथों में लगा कर अपने दोनों हाथों से, स्तनो के चारों तरफ से चुचुक की ओर गति करते हुए हल्के हल्के मालिश करते हुए स्तनों को उंगलियों में भरकर हल्का सा खिंचाव देना चाहिए। यह मालिश स्नान से लगभग आधा घंटा पूर्व करनी चाहिए।इस मालिश के नियमित प्रयोग से स्तन पुष्ट, उन्नत व सुडौल हो जाते हैं।

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