स्त्री मे श्वेत प्रदर रोग के कारण लक्षण और उपचार : Stri Me Shveta Pradar Rog Ke Karan Lakshan Aur Upchar

स्त्री मे प्रदर रोग के कारण

यह एक ऐसा रोग है जो अधिकांश महिलाओं में पाया जाता है। महिलाओं का प्रदर रोग ठीक उसी तरह होता है जैसे पुरुषों में प्रमेह रोग। प्रदर होने के कई कारण होते हैं योनि मार्ग में संक्रमण, घाव, शारीरिक दुर्बलता, भोजन में अनियमितता, शराब व मांस का सेवन, अजीर्ण रहना, दिन में सोना और रात में जागना, विलासी जीवन जीना, अनेक तरह की असंयमित मैथुन करना, मानसिक तनाव तथा अति शोक व दुख करना आदि। मासिक धर्म की अनियमितता के कारण भी प्रदर रोग हो जाता है।

लक्ष्मण

श्वेत प्रदर मे योनिमार्ग से पीला व सफेद, चिकना, बदबूदार लिसलिसा स्त्राव होता रहता है, प्रदर रोग से ग्रस्त रहने वाली स्त्री का स्वास्थ्य बिगड़ जाता हैं तथा उसका शरीर लगातार कमजोर होता चला जाता हैं।

उपचार

अंगूर : श्वेत प्रदर होने पर महिलाओं को चाहिए कि 100 ग्राम अंगूर नित्य खाएं। इससे मासिक धर्म भी नियमित समय पर आता है तथा श्वेत प्रदर भी समाप्त हो जाता है।

दो केला खाकर उसके पश्चात दूध में शहद मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।

दूध में केले की खीर बनाकर खाने से भी इस रोग में लाभ होता है।

ईसबगोल : सफेद मूसली या ईसबगोल की भूसी को शरबत के साथ खाने से प्रदर रोग में लाभ होता है।

सिंघाड़ा : श्वेत प्रदर में यदि महिलाएं नियमित रूप से सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर खाती रहे तो उनके गर्भाशय को बल मिलता है तथा प्रदार रोग भी ठीक हो जाता है।

जामुन : जामुन की ताजी हारी छाल को सुखाकर बारीक करके सुबह शाम 4 – 4 ग्राम की मात्रा में बकरी के दूध के साथ खाएं तो प्रदाइ में बहुत लाभ होता है जामुन का रस भी लाभदायक हैंं।

अंजीर : श्वेत प्रदर मे अंजीर का नियमित सेवन काफी लाभदायक है।

आम : आम की गुठली की गिरी का 2 – 2 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार पानी निगलने से बहुत लाभ होता है।

आंवला : तीन ग्राम आंवले का चूर्ण लगभग 6 ग्राम शहद में मिलाकर नित्य एक बार लेने से  श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है।यह उपचार एक माह तक नियमित करें व इस दौरान खटाई से परहेज रखें।

फालसा : फलसे का शराबत नियमित रूप से पीने से श्वेत प्रदर में काफी फायदा होता है।

चुकंदर : लगभग 100 ग्राम गाजर के रस में 25 ग्राम चुकंदर का रस मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है।

छुहारा : छुहारों की गुठलियों को कूट पीसकर महीन चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शुद्ध घी में अच्छी तरह भून लें। तथा किसी शीशी में भरकर रख लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह शाम खाएं। श्वेत प्रदर पूर्णतया समाप्त हो जाएगा।

 

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