स्त्री में रक्त प्रदर रोग के कारण लक्षण और उपचार : Stri Me Rakta Pardar Rog Ke Karan Lakshan Aur Upchar

स्त्री मे रक्त प्रदर रोग के कारण

रक्त प्रदार होने के कई कारण हैं जिनमें अति मिथुन करना, ऋतु काल मे सहावास करना, अधिक नमकीन, खट्टे व तेज मिर्च मसालेदार भोजन व मांसाहारी व्यंजनों का अति सेवन उल्लेखनीय है। इसके अलावा गर्भपात व अपथ्य पदार्थों के सेवन से भी रोग हो जाता है।

लक्षण

ऋतु काल में ज्यादा रक्त स्त्राव, जांघों व पिंडलियों के अलावा पेट में, नाभि क्षेत्र के नीचे तेज दर्द होना, चेहरा पीला पड़ जाना व रक्ताल्पता इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार

केला : पके हुए केले को दूध में कई बार सानकर कुछ दिनों तक नित्य सेवन करने से योनि से बहता हुआ रक्त रुक जाता है।

सिंघाड़ा : सिंघाड़े के आटे की रोटी बनाकर खाने से रक्त प्रदर मिट जाता है।

नियमित ताजा सिंघाड़े खाना भी इस रोग में लाभप्रद हैं।

बेल : 10 ग्राम बेल की गिरी, 10 ग्राम रसौत और नागकेसर पीसकर छानकर शीशी में भर लें। चावल के मांड के साथ 5 ग्राम चूर्ण खाएं। यह उपचार दिन में तीन बार करें। एक-दो सप्ताह में रक्त प्रदर ठीक हो जाएगा।

तरबूज : तरबूज के लाल बीज और मिश्री 1-1 तोला पीसकर पानी के साथ खाने से रक्त प्रदर समाप्त हो जाता है।

अनार : अनार के सूखे छिलके पीसकर छान लें। इसकी एक चम्मच मात्रा ठंडी पानी के साथ दिन में 2 बार खाने से रोग का प्रभावी उपचार हो जाता है।

गन्ना : गन्ने का रस पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

आंवला : नियमित एक आंवला जरूर खाएं, काफी लाभ होगा।

चुकंदर : चुकंदर का रस पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

गाजर : नित्य एक गिलास गाजर का रस पीएं। एक माह तक इस उपाय को आजमाएं। रक्त प्रदर मिट जाएगा।

 

 

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