सर्प विष के उपचार : Sarp Vish Ke Upchar

सांप कई प्रकार के होते हैं। कुछ सांपों का विष तीव्र व मरका होता है, जबकि कुछ का थोड़ा हल्का जिस स्थान पर सांप ने काटा हो उस स्थान से तीन-चार इंच ऊपर नाड़ा, चुन्नी आदि को कसकर बांध दें। सांप के काटे हुए स्थान को चीरकर उसमें पिसा हुआ नमक मलना चाहिए। इस प्रक्रिया से विष खून के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। इस क्रिया को तब तक दोहराते रहें। जब तक नीले रंग का खून निकलना बंद न हो जाए। अर्थात जब तक रक्त का रंग पूर्णतया लाल न हो जाए तब तक यह प्रक्रिया दोहराते रहे तथा बंधे हुए स्थान को भी ना खोलें। यहां यह भी ध्यान रखें कि रोगी सोने न पाए। यह बहुत घातक साबित होता है। इस प्रक्रिया के बाद निम्न उपचार करें।

उपचार

नीबू : नीबू के रस में जमालघोटे को घिसकर दंशित व्यक्ति की आंखों में काजल की भांति आंजने से रोगी शीघ्र ही ठीक हो जाता हैं।

अदरक : शुद्ध देशी घी, शुद्ध शहद, पीपल, काली मिर्च व सेंधा नमक के साथ अदरक मिलाकर पीसकर छान लें। फिर इन सबको पानी में मिलाकर दंशित व्यक्ति को पिलाएं। इससे सभी प्रकार के सर्प विषों मे काफी लाभ होता है।

केला: केले के तने को कुचलकर उसका रस निकालकर 10 -10 मिनट के अंतर से रोगी को कुछ घंटों तक पिलाते रहे। इससे सांप के काटे हुए व्यक्ति की जान बच जाएगी।

बेल : बेल की 10 ग्राम जड़ को पीसकर चौलाई की जड़ व बेलपत्र भी इतनी ही मात्रा  पीसकर काटे हुए व्यक्ति को तुरंत पिला दें।

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