गुदभ्रंश (कांच निकलना) | prolapse of rectum in hindi

छोटे बच्चे अतिसार व कोष्ठबद्धता (कब्ज) के कारण गुदभ्रंश के शिकार होते है। जनसाधारण में गुदभ्रंश की विकृति को कांच निकलना भी कहा जाता है। संक्रामक रोगो में जब कोई बच्चा शारीरिक रूप से अत्यधिक निर्बल होता है तो गुदभ्रंश की विकृति होती है। अतिसार, कोष्ठबद्धता या अर्श रोग में वयस्क स्त्री-पुरुष भी गुदभ्रंश के शिकार हो जाते हैं।
गुदभ्रंश की विकृति कैसे होती है? |
जब कोई बच्चा कोष्ठबद्धता (कब्ज) से पीड़ित होता है तो उसे शौच के लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है। मल अधिक शुष्क
और कठोर होने के कारण जोर लगाने पर गुदा की श्लैष्मिक कला (त्वचा) को भी बाहर निकाल देता है। अतिसार की अधिकता से भी गुदभ्रंश की विकृति होती है, क्योंकि अधिक अतिसार होने पर मलद्वार की श्लैष्मिक कला अधिक कोमल होने पर बाहर की ओर निकलने लगती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गुदभ्रंश की विकृति बच्चों को अधिक होती है. लेकिन वयस्क स्त्री-पुरुष भी गुदभ्रंश से पीड़ित हो सकते हैं। जब आंत की श्लैष्मिक कलाम से बाहर निकलती है तो उसे ‘प्रोलेप्स एनाई’ कहते हैं। जब आंत का कुछ भाग पूरी तरह बाहर निकल आता है तो उसे प्रोलेप्स रेक्टाई कहते हैं। अर्श रोग में वयस्क स्त्री-पस प्रोलेक्स एनाई से अधिक पीड़ित होते हैं। ___उदर में अधिक कमि होने और चिकित्सा में विलंब होने से गुदभ्रंश की बिकृति होती है। किसी रोग से पीडित होने पर बच्चे शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाते हैं तो उनकी गुदा की मांस-पेशियां बहुत क्षीण हो जाती हैं। ऐसे में अतिसार या कब्ज होने जल्दी-जल्दी गुदभ्रंश होने लगता है।

गुणकारी घरेलु नुस्खे

1. अनार के 100 ग्राम पत्तों को 1 किलोग्राम जल में उबालकर दिन में कई बार उस जल से गुदा साफ करने से गुदभ्रंश की विकृति नष्ट होती है।

2. अमरूद के वृक्ष की छाल 50 ग्राम, जड़ 50 ग्राम और पत्ते 50 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूट-पीसकर 400 ग्राम जल में उबालें आधा जल शेष रह जाने पर जल को छानकर गुदा प्रक्षालन (धोने) से बहुत लाभ होता है।

3. काली मिर्च 5 ग्राम, भुना हुआ जीरा 10 ग्राम दोनों को मिलाकर दिन में दो बार प्रातः और सायं को तक्र (मठे) के साथ सेवन करने से गुदभ्रंश नष्ट होता है।

4. एक ग्राम फिटकरी को 30 ग्राम जल में घोल लें। शौच के बाद जल से मलद्वार स्वच्छ करने के बाद रुई द्वारा फिटकरी के जल को लगाने से कुछ दिनों में गुदभ्रंश से मुक्ति मिलती है।

5. माजूफल, फिटकरी, त्रिफला चूर्ण और कत्था सभी को 10-10 ग्राम लेकर जल में डालकर रख दें। एक-दो घंटे बाद वस्त्र द्वारा जल छानकर मलद्वार स्वच्छ करने से गुदभ्रंश का निवारण होता है।

6. कमल के पत्ते 5 ग्राम और शक्कर 5 ग्राम बारीक पीसकर 10 ग्राम जल के साथ सेवन करने से गुदभ्रंश में बहुत लाभ होता है।

7. बबूल की 100 ग्राम छाल को 500 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाए। इस क्वाथ में गुदामार्ग का प्रक्षालन करने से गदभ्रंश की विकृति नष्ट होती है।

8. भागरा की जड़ 30 ग्राम, हल्दी का चूर्ण 20 ग्राम जल के साथ पीसकर गुदर्भश पर लगाने से बहुत लाभ होता है|

9. पपीते के पत्तों को पीसकर जल में मिलाकर गुदभ्रंश को धोने से लाभ होता है |

10. जामुन, पीपल, बड़ और बहेड़ा के 20-20 ग्राम पत्तों को 500 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाए। इस जल को छानकर गुदभ्रंश धोने से विकृति नष्ट होती है |

11. भांग के पत्तों का रस निकालकर गुदभ्रंश पर लगाने से लाभ होता है |

12.एरंड के तेल को हरे काच की शीशी में भरकर एक सप्ताह तक धूप में रखें। इस तेल को गुदभ्रंश में रुई से लगाने पर बहुत लाभ होता है।

13. गुदभ्रंश की विकृति को रोकने के लिए रोगी को छोटी हरड का चूर्ण 2 माशे सुबह, 2 माशे शाम को हल्के उष्ण जल से सेवन कराएं। इससे कब्ज नष्ट होने से गुदभ्रंश की विकृति नहीं होती है।

14.हरड़ या आंवले का मुरब्बा खाकर दूध पीने से भी कब्ज नष्ट होने पर गुदभ्रंश की विकृति से सुरक्षा होती है।

15.कत्थे को पीसकर घी और मोम को गर्म करके उसमें मिलाकर गुदभ्रंश में लगाने पर बहुत लाभ होता है।

16. एक अमरूद और नाग केसर दो रत्ती को मिलाकर खिलाने से गुदभ्रंश नष्ट होता है |

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