नीम के फयादे और नुक्सान /Neem benefits in hindi

पर्यावरण को शुद्ध करने में नीम के वृक्ष सबसे अधिक सहायता करते हैं क्योंकि नीम की पत्तियों से गुणकारी तत्वों के कारण जीवाणुओं को नष्ट करने की शक्ति सबसे अधिक होती है नीम की जीवाणु नाशक तत्वों के कारण इससे अनेक एंटी सेप्टिक औषधियां बनाई जाती है नीम के रस से निर्मित साबुन शरीर की त्वचा संबंधी रोग विकारों को नष्ट करते हैं|

नीम के वृक्ष की पतली दातुन से दांत साफ करने से जीवाणु नष्ट होते हैं नीम की पत्तियों और फल के सेवन से अनेक रोग विकारों को नष्ट किया जा सकता है नीम के बीजों से गुणकारी तेल भी निकलता है इस दिल की एक बूंद दातों में लगाने से दांत के कीड़ों को नष्ट करके शूल का निवारण सरलता से हो जाता है नीम के वृक्ष सभी जगह पाए जाते हैं घरों के आसपास नीम के वृक्ष होने से वातावरण जीवाणुओं से शुद्ध रहता है आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार नियम शीत वीर्य होने के कारण दाह और उष्णता को नष्ट करता है|

गुणकारी औषधीय उपयोग

1 . नीम की पत्तियों को जल में उबालकर उससे फोड़े फुंसियों और वर्ल्ड को धोने से बहुत लाभ होता है|

2. कुष्ठ रोगियों को प्रतिदिन नीम की पत्तियों उबालकर स्नान करने से बहुत लाभ होता है|

3.मीठे नीम की पत्तियों का विभिन्न रोग विकारों में उपयोग किया जाता है|

4.नीम की पत्तियों को कूट पीसकर ब्रांड पर लगाने से जल्दी लाभ होता है और शोथ नष्ट होता है |

5.अर्श रोग में नीम के पके हुए फल निंबोली खाने से बहुत लाभ होता है रक्त विकार भी नष्ट होते हैं और खाज खुजली से मुक्ति मिलती है|

6. नीम के पत्ते पीसकर दही और बेसन में मिलाकर चेहरे वह दूसरे अंगों में लगाने से और कुछ देर बाद जल से साफ कर देने से चेहरे की फुंसियां मुंहासे नष्ट होते हैं त्वचा मे भी निखार आता है।

7. टूथपेस्ट में नीम की पत्तियों का रस मिलाने से दांतो के जीवाणु नष्ट होते हैं ।

8.नीम तुलसी पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसमें मुल्तानी मिट्टी और चंदन का चूर्ण मिलाकर इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने से चेहरे के मुहासे नष्ट होने के साथ ही त्वचा का सौंदर्य विकसित होता है।

9. नीम की पत्तियों का रस जल में मिलाकर स्नान करने से खाज खुजली नष्ट होती है साथ ही फोड़े फुंसियों को भी नीम की पत्तियों का रस नष्ट करता है।

10. नीम के वृक्ष की छाल जल के साथ घिसकर लगाने से फोड़े फुंसियों नष्ट होते हैं ।

11.नीम की पत्तियों को जल में उबालकर छानकर घाव धोने से मवाद के जीवाणु नष्ट होते हैं।

12.नीम की दातुन करने से मसूड़ों के जीवाणु नष्ट होते हैं दांतों में कीड़े नहीं लगते हैं और दांत साफ होते हैं ।

13.नीम की निंबोली की गुठली से निकाला गया तेल दातों में लगाने से कीड़े नष्ट होते हैं और शूल का निवारण होता है।

14.नीम के तेल की बूंदें कान में डालने से कडशूल और कान की फुंसी नष्ट होती है ।

15.नीम की कोमल पत्तियों को पीसकर किसी कपड़े में बांधकर रस निकालें इस रस में मधु मिलाकर सेवन करने से बुखार नष्ट होता है यह प्रतिदिन दो तीन बार सेवन करना चाहिए ।

16.कुष्ठ रोगियों को नीम की पत्तियां जल में उबालकर प्रतिदिन स्नान करने से बहुत लाभ होता है ।

17.नीम का तेल कुष्ठ पर लगाने से पूय के जीवाणु नष्ट होतेे हैं ।

18.नीम का तेल योनि में लगाने से  गर्भधारण की आशंका नष्ट होती है।

19. नीम की पत्तियों को जल में उबालकर उस जल को वस्त्र द्वारा छानकर कुल्ले करने से दातों के जीवाणु नष्ट होते हैं साथ ही ही पायरिया रोग में बहुत लाभ होता है।

20. नीम की निबोलिया कुछ दिनों तक खाने से मंदाग्नि की विकृति नष्ट होती है निबोलियां पक जाने पर स्वादिष्ट लगती हैं।

21.नीम की नीबोलियों को को पीसकर कपड़े की पोटली बनाकर योनि में रखने से सूल नष्ट होता है और प्रदर रोग के जीवाणु नष्ट होते हैं।

22 इनके गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर उनका रस पीने से आंत्र कृमि नष्ट होते हैं ।

23.नीम की पत्तियों को जल में उबालकर जल को छानकर योनि को स्वच्छ करने से सभी तरह के जीवाणु नष्ट होते हैं दुर्गंध का भी निवारण होता है।

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