कृष्टार्तव , मासिक धर्म (ऋतुस्राव में अधिक पीड़ा) | Menstrual More pain in seasonal secretions in hindi

ऋतुस्राव (मासिक धर्म) में नवयुवतियों को हल्की पीड़ा होना स्वाभाविक होता है, लेकिन जब ऋतुस्राव के समय पीड़ा अधिक बढ़ जाए तो किसी रोग का कारण बन सकती है। ऋतुस्राव की पीड़ा लड़कियों को अधिक विचलित कर देती है। कुछ लड़कियों को ऋतुस्राव के प्रारंभ होने से 3-4 दिन पहले तीव्र पीड़ा होने लगती है। चिकित्सा विशेषज्ञ इस विकृति को ‘कृष्टार्तव’ के नाम से संबोधित करते हैं।

कृष्टार्तव की विकृति कैसे होती है? 

18 से 24 वर्ष की लड़कियां व नवयुवतियां इससे पीड़ित हो सकती हैं। विवाह के बाद अधिकतर लड़कियों में पीड़ा की विकृति स्वयं नष्ट हो जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कृष्टार्तव की विकृति दो तरह की हो सकती है। एक विकृति में रक्त की अधिकता रहती है। दूसरी में ऋतुस्राव के समय अधिक ऐंठन होती है। ऋतुस्राव प्रारंभ होने से तीन-चार दिन पहले कमर, पेट और गर्भाशय में पीड़ा होने लगती है। वमन और कंपकंपी के लक्षण दिखाई देते हैं। उदर और पीठ के नीचे के हिस्से में तीव्र पीड़ा होती है। ऋतुस्राव में पीड़ा की इस विकृति में नवयुवतियों के स्तनों में शोथ के लक्षण होते हैं। सिरदर्द भी बहुत होता है। ऐसे में लड़कियों को कुछ खाना-पीना अच्छा नहीं लगता है। कुछ लड़कियां ऋतुस्राव से पहले पीड़ा की अधिकता के कारण अधिक भयभीत हो जाती हैं।

गुणकारी औषधीय नुस्खे

1. गोखरू को 15 ग्राम मात्रा में लेकर 250 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बना। इस क्वाथ में खुरासानी अजवायन का चूर्ण 1 ग्राम और खाने का सोडा आधी रत्ती मिलाकर सेवन करने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।

2. कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मधु मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव में पीडा की बिकृति नष्ट होती है।

3. नीम के पत्तों को भाप में गर्म करके योनि पर बांधने से ऋतस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।

4. मूली के बीजों को 5 ग्राम की मात्रा में पीसकर सुबह-शाम जल के साथ सेवन करने से ऋतुस्राव में कष्ट की विकृति नष्ट होती है।

5. 10 ग्राम सोंठ को 300 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। इस क्वाथ को गुड़ मिलाकर पीने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।

6. 10 ग्राम अजवायन को 100 ग्राम गुड़ के साथ लोहे की कड़ाही में घी डालकर हलवा बनाएं। इस हलवे को दो-तीन बार सेवन करने से ऋतुस्राव में पीडा नहीं होती है।

7. 5 ग्राम बथुए के बीजों को 200 ग्राम जल में खूब देर तक उबालें। 100 ग्राम शेष रह जाने पर छानकर पीने से ऋतुस्राव के समय पीड़ा नहीं होती।

8. गाजर के बीज 5 ग्राम मात्रा में 100 ग्राम जल में उबालकर 25 ग्राम गुड़ मिलाकर सेवन करने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।

9. अपामार्ग की जड़ 10 ग्राम, कपास के फूल 10 ग्राम, गाजर के बीज 10 ग्राम 250 ग्राम जल में उबालें। जब 20 ग्राम जल शेष रह जाए तो छानकर रात्रि के समय पिलाने से प्रातः ऋतुस्राव बिना पीड़ा के होता है।

10. अजवायन 10 ग्राम का चूर्ण बनाकर हल्के उष्ण जल से सेवन करने पर ऋतुस्राव सरलता से होने लगता है।

11. एक ग्राम केसर 300 ग्राम दूध में उबालकर पिलाने से ऋतुस्राव में कष्ट की विकृति नष्ट होती है।

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