मदार (आक ) के फायदे और नुकसान/ Madaar ke fyade in Hindi

 

आक किसी भी जगह अपने आप उगने वाली गुणकारी बनस्पति है इस वनस्पति को पशु पक्षी भी नहीं खाते हैं| आक के गुणों से बहुत कम व्यक्ति परिचित हैं जनसाधारण में आक को मदार अक्वा के नाम से संबोधित किया जाता है। देश के सभी प्रदेशों में आंक की उत्पत्ति होने के कारण विभिन्न प्रदेशों में इसे अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता है आंक का पौधा 3 फीट तक ऊंचा होता है यह ग्रीष्म ऋतु में हरा भरा दिखाई देता है इस पौधे की जड़ पुष्प और पत्तों का सेवन किया जाता है ।स्वेत और लाल दो रंग में आंख की उत्पत्ति होती है आक को काटने पर उसमें से सफेद रंग का दूध निकलता है डॉक्टरों के अनुसार आक का दूध स्निग्ध लवण और रसयुक्त ,उसडवीर्य,तिक्त, व्यतीत उत्तम विरेचक वमन कारक होता है कुष्ठ, गुल्म, उदर रोगों में गुणकारी औषधि के रूप में आक के दूध का उपयोग किया जाता है यह बवासीर बात विकारों में बहुत लाभ पहुंचाता है इसके सेवन से किर्मी भी नष्ट होते हैं|

आंख के फूलों को भगवान शिव की पूजा में अर्पित किया जाता है स्त्रियों के ऋतु स्त्राव में फूलों के सेवन से बहुत लाभ होता है लाल आक के पुष्प भी गुणकारी होते हैं यह कुष्ट सिफलिस अर्श किर्मी खांसी और सांस रोग में बहुत लाभ पहुंचाते हैं यूनानी चिकित्सा में भी आक का विभिन्न रोगों में इस्तेमाल किया जाता है

गुणकारी औषधि उपयोग

1. आंख के दूध में हल्दी को पीसकर इसका चेहरे पर लेप करने से चेहरे के दाग धब्बे और मुंहासे नष्ट होते हैं तथा सुंदरी विकसित होता है ।

2.आक की जड़ को पीसकर जल में मिलाकर छानकर पीने से सांप के काटने का विश्व प्रभाव नष्ट होता है।

3.आक के दूध को पांव के तलवों पर मलने से कुछ सप्ताह में मिर्गी रोग से भी आराम मिलता है ।

4.आक के दूध की दो तीन बूंदे बतासे में डालकर यवछार खाने से अर्श रोग में बहुत लाभ होता है।

5.बतासे में आक के दूध की 2 बूंदे टपकाकर प्रातः सूर्योदय से पहले सेवन करने से आधासीसी का दर्द नष्ट होता है ।

6.आक का दूध हल्दी और शिरीष के बीजों को कूट पीसकर अर्श रोग में के मस्सों पर प्रतिदिन लगाने से मस्से सीखे गायब हो जाते हैं।

7.आक का दूध मिलने से संधि शोथ आमवात की पीड़ा तुरंत नष्ट होती है ।

8.आक के फूलों का लौंग जल के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द नष्ट होता है इसका सेवन सूर्योदय से पहले करना चाहिए|

9.पांच से छह आंख के फूलों को पीसकर दूध में मिलाकर 3 से 4 सप्ताह तक सेवन करने से पथरी की विकृति में बहुत लाभ होता है ।

10.आक के फूलों के भीतर कि 4 से 5 लौंग प्रतिदिन खाने से पाचन शक्ति तीव्र होने से अग्नि माह की विकृति का निवारण होता है।

11.स्वेत आक के फूलों की माला बनाकर प्रतिदिन पहनने से उच्च रक्तचाप सामान्य स्थिति में पहुंच जाता है ।

12.आक की जड़ को जल के साथ पीसकर उसकी बत्ती बनाकर योनि में रखने से योनि की शिथिलता नष्ट होती है इस बत्ती को गुदा में रखने से कोष्ठबद्धता तुरंत नष्ट होती है।

13.लाल आक के 3 रत्ती फूलों को तिल के 6 माशे तेल के साथ पकाकर सेवन करने से स्त्रियों के ऋतुस्त्राव के अवरोध में बहुत लाभ होता है ऋतु स्त्राव का अवरोध नष्ट होता है ।

14.आक के फूलों को कूट पीसकर बांधने से एंडी की पीड़ा नष्ट होती है ।

15.आक के फूलों को तिल के तेल में तलकर सेवन करने से रक्त गुल्म रोग में बहुत लाभ होता है।

सावधानी:-  आक का उपयोग किसी भी चिकित्सक से सलाह लेकर ही करे क्योंकि आक के फल और दूध में विषैलापन होता है इसीलिए डॉक्टर के परामर्श से ही इसका उपयोग करें।

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