श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) के उपचार | Leukorrhea, shwaet prder white discharge in hindi

आधुनिक परिवेश में यौन स्वच्छंदता, अश्लील फिल्मों के अवलोकन और अधिक सहवास में संलग्न रहने वाली नवयुवतियां श्वेत प्रदर अर्थात ल्यूकोरिया रोग से अधिक पीड़ित रहती हैं। धनाढ्य परिवार की नवयुवतियां अधिक स्वादिष्ट भोजन करती है प्रकृति-विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का सेवन करती हैं, होटल, रेस्तरां में अधिक चटपटे, उष्ण मिर्च-मसालों और अम्ल रसों से निर्मित खाद्य-पदार्थों का अधिक समय तक सेवन करती हैं तो उन्हें श्वेत प्रदर रोग से पीड़ित होना पड़ता है।

श्वेत प्रदर रोग की उत्पत्ति कैसे होती है? |

हर समय अधिक चटपटे, मिर्च-मसाले और अम्लरसों से बने खाद्य-पदार्थों के सेवन से रक्त में अनेक विकृतियों का समावेश होता है। जो आगे चलकर श्वेत प्रदर की उत्पत्ति कर देता है। अधिक सहवास, अप्राकृतिक मैथुन, मानसिक मैथुन और कामुकता में खोए रहने वाली लड़कियां श्वेत प्रदर से पीड़ित होती हैं। अधिक संतानों को जन्म देने वाली स्त्रियां भी श्वेत प्रदर रोग से रोगग्रस्त होती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक निर्बलता की अधिकता भी श्वेत प्रदर को जन्म देती है। अजीर्ण, कोष्ठबद्धता (कब्ज), गर्भाशय की विकृति, ऋतुस्राव में अवरोध व अधिक मात्रा में स्राव होने के कारण भी श्वेत प्रदर हो सकता है। मूत्राशय में शोथ होने पर श्वेत प्रदर हो जाता है।श्वेत प्रदर में स्त्रियों की योनि से पतला, गाढ़ा, सफेद रंग का चिकना स्राव निकलता है। श्वेत प्रदर रोग में शारीरिक निर्बलता तेजी से बढ़ती है। चिकित्सा में विलंब और भोजन में लापरवाही होने से अधिक लेसदार, चिपचिपा और दुर्गन्धयुक्त श्वेत प्रदर स्त्राव होने लगता है। श्वेत प्रदर होने पर रोगिणी के मस्तिष्क में शूल, शरीर के विभिन्न अंगों में पीडा, योनि में जलन, खुजली होती है। स्त्रियों की कमर में अधिक दर्द होता है। श्वेत प्रदर में योनि में तीव्र जलन और तीव्र खुजली होती है। थोड़ा-सा कार्य करने में भी नवयुवतियों को अधिक पीड़ा होती है। प्रदर रोग के कारण अधिक दुर्गन्धयुक्त स्राव होता है। सहवास में भी नवयुवतियों को भारी पीड़ा होती है।

गुणकारी घरेलु नुस्खे

1. सूखे आंवलों को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ कुछ महीने सेवन करने से श्वेत प्रदर रोग नष्ट होता है।

2. पके हुए झरबेरों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें । प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण शक्कर और मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

3. नागकेशर 3 ग्राम प्रतिदिन तक्र (मठे) के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर का निवारण होता है।

4. रोहितक की जड़ को जल के साथ पीसकर चाटकर सेवन करने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।

5. पके हुए दो केले घी और शक्कर के साथ खाने से कुछ सप्ताह में श्वेत प्रदर से मुक्ति मिलती है।

6. गुलाब के फूलों को छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बनाएं। 3 ग्राम चूर्ण सुबह गाय के दध के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

7. अनार के छिलकों को पीसकर जल में उबालकर उसको छानकर वस्त्र भिगोकर योनि में रखने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

8. मुलहठी का चूर्ण 1 ग्राम मात्रा में जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर से मुक्ति मिलती है|

9. शिरीष की छाल का चूर्ण 1 ग्राम मात्रा में घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

10. बला की जड़ का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन मधु मिलाकर सेवन करने और दूध पीने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।

11. बड़ी इलायची, माजूफल को बराबर मात्रा में लेकर दोनों के बराबर मिसरी मिलाकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम चूर्ण प्रातः, 2 ग्राम चूर्ण सायं को जल के साथ सेवन करने से स्त्रियां श्वेत प्रदर से मुक्त होती हैं।

12. ककड़ी के बीज, कमल ककड़ी, जीरा और शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर 2 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से श्वेत प्रदर धीरे-धीरे नष्ट होता है।

13. 2 ग्राम जीरे के बारीक चर्ण को बराबर मात्रा में मिसरी मिलाकर चावल के धोवन के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।
14. श्वेत प्रदर की विकति में चावल के धोवन के जल से बहुत लाभ होता है| चावल को तीन-चार घंटे पहले जल में डालकर रखें। फिर उन चावलों को थोडा मसलकर जल छानकर पीने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

15. फिटकरी को जल में मिलाकर योनि प्रक्षालन में बहुत लाभ होता है।

16. नीम के पत्तों को जल में उबालकर उस जल को छानकर योनि स्वच्छ कराने श्वेत प्रदर के ‘ट्राइकोमोनास वैजाइनैलिस’ नामक जीवाणु नष्ट होते हैं। डिटोल को जल में मिलाकर भी योनि को स्वच्छ करें।

17. काली मिर्च, छोटी पीपल, कूठ, शतावर, सेंधा नमक और उड़द सभी बस्तुये बराबर मात्रा में पीसकर जल मिलाकर लंबी बत्ती बनाएं। रात को सोने इस बत्ती को योनि में लगाने से प्रदर में लाभ होता है।

18. तिल को पीसकर चूर्ण बनाएं। 10 ग्राम चूर्ण मधु मिलाकर खाने से बहुत लाभ होता है।

19. मलहठी की जड़ का चूर्ण 5 ग्राम मात्रा में इतनी ही मिसरी मिलाकर हल्के गरम जल के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।

20. ताजे आंवलों का रस निकालकर 10 मि.लि. की मात्रा में मध मिलाकर करने से श्वेत प्रदर रोग नष्ट होता है।

21. 10 ग्राम मली के कोमल, ताजे पत्तों का रस प्रतिदिन पीने से श्वेत प्रदर रोग नष्ट होता है।

22. गुलाब के फूलों की कोमल पंखुड़ियां लगभग 50 ग्राम मात्रा में मिसरी मिलाकर खाने से और फिर गाय का दूध पीने से श्वेत प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है।

23. 3 ग्राम आंवले का चूर्ण और मधु मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से श्वेत प्रदर की विकृति नष्ट होती है।

24. गाजर का रस 200 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन पीने से श्वेत प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है। गाजर के रस में 30 ग्राम चुकंदर का रस मिलाकर सेवन करने से प्रदर का निवारण होता है।

25. नागकेसर को पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। आधे ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन तक्र (मठे) के साथ सेवन करने से धीरे-धीरे श्वेत प्रदर का निवारण होता है।

26. अश्वगंधा का 3 ग्राम चूर्ण प्रातः और सायं दूध के साथ सेवन करने से प्रदर रोग नष्ट होता है और शारीरिक शक्ति का विकास होता है।

27. अनार के कोमल पत्ते 10 ग्राम और 7-8 दाने काली मिर्च के लेकर 200 ग्राम जल में देर तक उबालें। फिर जल को छानकर पी लें। कुछ सप्ताह तक सेवन करने से श्वेत प्रदर रोग नष्ट हो जाता है।

 

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