खट्टी डकारें, उल्टियां आने के कारण, लक्षण और उपचार : Khatti Dakare Ultiya Ane Ke Karan Lakshan Aur Upchar

खट्टी डकारें व उल्टियां के कारण व लक्षण

वस्तुतः खट्टी डकारें व उल्टियां होना अपच व अजीर्ण के ही लक्षण हैं, जो असंयमित भोजन के कारण उत्पन्न होते हैं। जब ज्यादा गरिष्ठ भोजन या फिर दिन भर अनियमित रूप से कचौड़ी, समोसे जैसे गरिष्ठ व तैलीय पदार्थों का सेवन कर लिया जाए तो खट्टी डकारें आना व उल्टियां होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं।

उपचार

सेव : खट्टी डकार आने पर सेव का सेवन लाभदायक होता है।

शरीफ पाचन प्रणाली को सुचारू करता है। इसके सेवन से खट्टी डकार आना व उल्टियां  जैसी शिकायत नहीं होती।

इमली : पकी हुई इमली का गूदा पित्त की अधिकता से होने वाली उल्टियां में सहायक होता है इससे अम्लपित्त में तो काफी राहत मिलती है खट्टी डकार आना भी बंद हो जाती हैं।

उल्टियां होने की स्थिति में इमली को पानी में भिगोकर उसका रस छानकर पीने से लाभ होता है। इसमें स्वादानुसार काला नमक भी डाल जा सकता हैं।

नींबू : नींबू अम्लनाशक फल है। नींबू का रस गर्म पानी में डालकर सायंकाल पीने से अम्लपित्त समाप्त हो जाता है। एक कप गर्म पानी में एक नींबू का रस डालकर पीएं।

आंवला : दो चम्मच आंवले के रस में इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर पीएंं या बारीक सूखा व पिसा हुआ आंवला व मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पानी सेे फंकी कर लें। इससे समस्त पाचन दोष दूर हो जाएंगे।

केला : दो केलों को मथ कर चीनी और इलायची मिलाकर खाने से एसिडिटी में काफी लाभ होता हैं।

पके हुए केले पर घी डालकर खाने से भी पित्त की अधिकता खत्म हो जाती है।

गाजर : नित्य गाजर का रस पीने से खट्टी डकारें नहीं आती व एसिडिटी समाप्त हो जाती है।

नारंगी : उल्टियां होने पर नारंगी का सेवन करने से लाभ होता है।

तरबूज : प्रातः एक गिलास तरबूज के रस में मिश्री मिलाकर पीएं। इससे उल्टियां होना बंद हो जाता है।

गन्ना : पित्त की उल्टी होने पर एक गिलास गन्ने के रस में दो तीन चम्मच शहद मिलाकर पीएं। चमत्कारी असर होगा।

नारियल : खट्टी डकारें आने पर कच्चे नारियल की गिरी खाने से बहुत लाभ होता है।

ब्लैकबेरी : यात्रा के समय उल्टियां होने लगे तो ब्लैकबेरी का सेवन लाभप्रद रहता है।

नाशपाती : नाशपाती के शरबत मे तो शरबत में बेर की मींगी डालकर पीने से रक्त वमन रूक जाता है।

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