ककोडा के फायदे / Kakoda ke fyade in hindi

ककोड़ा को खेससा भी कहा जाता है ककोड़ा की बेल पर वर्षा ऋतु में ककोड़ा की उत्पत्ति होती है इन कपड़ों की सब्जी बनाकर खाई जाती है देश के सभी प्रदेशों में कपड़ों की उत्पत्ति होती है खाली स्थानों पर झाड़ियों के बीच ककोड़े अपने आप भी उड़ जाते हैं ककोड़े करेले के आकार में बहुत मिलते-जुलते हैं इनमें छोटे-छोटे कांटे भी होते है। ककोड़ा के रस में कड़वाहट होती है ।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार करोड़ों की कड़वाहट इनके गुणों को विकसित करती है ककोड़े की बेल पर पीले रंग के पुष्प खेलते हैं कपड़ों के सेवन से वात विकार नष्ट होते हैं काला ज्वर में ककोड़ा गुणकारी कहा जाता है ककोड़े के बीच प्रारंभ में स्वत होते हैं लेकिन जब कोकोड़े पक जाते हैं तो बीच काले हो जाते हैं चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार पकोड़े कोस्ट बाध्यता को नष्ट करते हैं ककोड़े की सब्जी पिता कब के विकारों का निवारण करती है ककोड़े अधिक होने के कारण मूत्र के रोग को नष्ट करता है अपने गुणकारी तत्वों के कारण ककोड़ा के सेवन से पथरी भी नष्ट होती है हृदय रोग से पीड़ित स्त्री पुरुषों को पकोड़े के सेवन से बहुत लाभ होता है कपड़े का रस रक्त को शुद्ध करके विभिन्न रक्त विकारों से सुरक्षित रखता है।

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. ककोड़े की सब्जी बनाकर सेवन करने से कप विकृती, काश खांसी ,ज्वार ,अरुचि, उधर के वायु विकार, गुल्म रोग नष्ट होते हैं |

2.ककोड़ों को सुखाकर उनको कूट पीसकर चूर्ण बनाकर रखें इस चूर्ण के सेवन से सर दर्द अतिसार और बवासीर रोग नष्ट होता है|

3.ककोड़े के पत्तों के रस में काली मिर्च का चूर्ण नारियल का जल और थोड़ा सा लाल चंदन घिस कर मिलाकर मस्तक पर लेप करने से पित्त प्रकोप से उत्पन्न सिर शूल नष्ट होता है |

4.ककोड़े के 5 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर चाट कर खाने से मूत्र का विरोध नष्ट होने पर मूत्र खुलकर आता है|

5.ककोड़ो के फल का चूर्ण बनाकर 10 ग्राम मात्रा में शक्कर मिलाकर कुछ दिनों तक प्रतेक सुबह  सायंकाल जल के साथ सेवन करने से अर्श  रोग नष्ट होता है| अर्श के अंकुरों से होने वाला रक्त स्त्राव भी बंद होता है|

6.ककोड़ो  की सब्जी से किसी को वात विकार होता है, तो सब्जी में लहसुन मिलाकर सेवन करना चाहिए|

7.बारिश के मौसम में ककोड़ो में अधिक जल अंश होता है ऐसी स्थिति में लहसुन मिलाकर सब्जी बनाने से पाचन क्रिया शीघ्रता से होती है

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