जूड़ी बुखार के कारण, लक्षण और उपचार : Juni Bukhar Ke Karan Lakshan Aur Upchar

जूड़ी  बुखार के कारण व लक्षण

सामान्य बुखार की तरह इस बुखार में भी रोगी के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तथा उसके शरीर में टूट न होने लगती है। प्यास भी अधिक लगती है।

उपचार

जामुन : जामुन का सिरका पीते रहने से विषम शीत ज्वर के कारण हुई पित्त ठीक हो जाती है। इसके नियमित उपयोग से यह बुखार जाता रहता है।

अंजीर : अंजीर को सिरके में डुबोकर शुबह शाम प्रतिदिन खाने से काफी राहत मिलती है।

नींबू : आधे नींबू के रस में चार चम्मच पानी तथा मीठा होने भर के लिए शक्कर मिल दे।  इस पेय को तीन-चार दिन तक रोगी को पिलाने से ज्वर में काफी आराम मिलती है।

आंवला : गिलोय, आंवला और नागरमोथा का काढ़ा पीने से यह ज्वर जड़ सेे नष्ट हो जाता है।

संतरा : प्रतिदिन एक गिलास संतरा का रस पीएं  काफी आराम की अनुभूति होगी।

सेवा : सेवा का सेवन रोगी के शरीर में  नवऊर्जा का संचार कर देता है।

बेल : पके हुए बेल के सेवन से विषम शीत ज्वर में काफी आराम मिलता है।

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