इसबगोल के फायदे /Isabgol ke fayde

इसबगोल की उत्पत्ति पौधे के रूप में होती है और इसका पौधा 2 से 3 फुट से ऊंचा नहीं होता है। पौधे पर गेहूं की बालों की तरह श्वेवेत फूल लगते है| पुष्पकणिका में बीज होते है ये बीज भूसी की तरह के होते हैं इन बीजों को छीलने से इसबगोल भूसी के नाम से अधिक प्रचलित है इस बगोल प्लेंटेजयेनेसी कुल की गुणकारी वनस्पति है जल में घुलने से इसका वसायुक्त लुआब बन जाता है, लेकिन इसमें कोई सुगंध वासवाद नहीं होता है ।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस बगोल मूत्रल, रक्त पित्त नाशक, कफ पित्त नाशक,बस्तिशोधक होती है इसके सेवन से रक्तातिसार की विकृत नष्ट होती है अफारा और सुजाक में भी यह बहुत उपयोगी है संग्रहणी रोग के निवारण के लिए विशेष रूप से इस बगोल का उपयोग किया जाता है इसके सेवन से आत्रों की शुष्कता नष्ट होती है।

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. इस बगोल को कूट पीसकर शरीर पर मलने से शरीर कोमल और स्थूल होता है।

2. अस्थमा रोग में इस बगोल बहुत लाभ पहुंचाता है अस्थमा रोगी को रोज इसबगोल खाना चाहिए।

3. क्रॉनिक बेसिलेरी डिसेंट्री में जीवाणु आत्रों में जख्म करके रक्तस्त्राव करते हैं ऐसा होने पर इसबगोल का उपयोग करना चाहिए।

4. यूनानी चिकित्सक रक्तातिसार और आंत्रशूल में इसबगोल का इस्तेमाल करते हैं।

5. इसबगोल को रात में जल में डालकर रखें प्रात उठकर थोड़ा सा मसलकर छानकर मिश्री मिलाकर सेवन करने से रक्ततिसार में बहुत लाभ होता है।

6. इस बगोल को दूध में देर तक उबालकर उसमें मिश्री मिलाकर खाने से स्त्रियों के श्वेत प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है |

7. कोष्ठबद्धता होने पर इस बगोल को जल में खोल कर लो आप बनाकर उसमें बादाम का तेल मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है कोष्ठबद्धता नष्ट होने से पेट दर्द भी नष्ट होता है।

8.इसबगोल को जल में डालकर रखें फिर इसमें युवाओं में खांड मिलाकर सेवन करने से वह शुरुआत की विकृत नष्ट होती है ।

9.इसबगोल की भूसी को 5 ग्राम मात्रा में हल्के गर्म जल या उबले हुए जल से सेवन करने पर कोष्ठबद्धता नष्ट होती है ।

10.इसबगोल को दूध में उबालकर भोजन से पहले सेवन करने से संग्रहणी रोग में बहुत लाभ होता है ।

11.इसबगोल को खोल खीरी के पुष्पों के साथ में थे पीस कर कान के पीछे लेप करने से अंशु धातु के प्रकोप से सुरक्षा होती है ।

12.इसबगोल को बादाम के तेल में मिलाकर मस्तक पर लेप करने से सर दर्द नष्ट होता है ।

13इसबगोल के नवाब में प्याज का रस मिलाकर हल्का सा गर्म करके कान में बूंद बूंद डालने से शूल नष्ट होता है।

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