हिस्टीरिया ( मिर्गी ) उपचार | Hysteria treatment in hindi

18 से 30 वर्ष तक की लड़कियां और नवयुवतियां हिस्टीरिया ( मिर्गी ) रोग से अधिक पीडित होती हैं। हिस्टीरिया रोग में लडकियां घर में काम करते हुए, सड़क पर चलते हुए या किसी से बातें करते समय कभी भी बेहोश हो सकती हैं। हिस्टीरिया रोग में लड़कियों के अचानक बेहोश होकर गिर जाने से अंधविश्वासी व्यक्ति इस रोग को भूत-प्रेत का प्रकोप मान लेते हैं। ऐसी स्थिति में किसी चिकित्सक से हिस्टीरिया की चिकित्सा करावा जादू-टोने वालों, ओझा व तांत्रिकों से टोने-टोटके व झाड़-फूंक कराते हैं। झाड-को हिस्टीरिया रोग अधिक विकत रूप धारण कर लेता है।

हिस्टीरिया ( मिर्गी ) रोग की उत्पत्ति कैसे होती है?

चिकित्सकों का ऐसा भी विश्वास है कि जब युवावस्था में लड़कियों की काम इच्छा पूरी नहीं हो पाती है तो वे कल्पना में भी इतनी गहराई तक पहुंच जाती है कि मानसिक आघात का सह नहीं पाने के कारण हिस्टीरिया से पीडित होती हैं। गर्भाशय की विकृतियां भी नवयुवतियों में हिस्टीरिया की उत्पत्ति कर सकती हैं।
हिस्टीरिया का दौरा किसी भी समय लड़कियों को बेहोश कर सकता है। कुछ लडकिया को दौरे का पहले से आभास हो जाता है और वे अपने वस्त्रों को संभालकर सावधान हो जाती है। यदि वे रसोईघर में गैस पर कोई काम कर रही होती हैं तो तुरत गस बद कर देती हैं। बेहोश होकर गिरने पर उनके दांत एक-दसरे पर कस जाते हैं। हिस्टारिया के दौरों के समय दांतों के बीच जीभ के कट जाने की आशंका रहती है। ऐसे में कोई रूमाल या कपड़े का टुकड़ा दांतों के बीच लगा देना चाहिए।
लड़कियां किसी से बातें करते हए दौरे के समय जोरों से बोलने लगती हैं या जोर से हंसने लगती हैं। कुछ लड़कियां जोर से चीखकर बेहोश हो जाती हैं 10 से 15 मिनट तक दौरों का प्रभाव रहता है। एक बार होश में आने पर रोगी लड़कियां फिर देर तक सोना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें सोने देना चाहिए।’

गुणकारी घरेलु नुस्खे

1. अनार के पत्ते 10 ग्राम, गुलाब के फूल 10 ग्राम दोनों को 400 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। 100 ग्राम शेष रह जाने पर छानकर, उसमें 10 ग्राम घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से हिस्टीरिया का प्रभाव कम होता है।

2. घृतकुमारी (ग्वारपाठा) का गूदा 10 ग्राम, मिसरी 10 ग्राम मिलाकर त्रिफला के जल से सेवन करने से हिस्टीरिया रोग में बहुत लाभ होता है। (त्रिफला को रात्रि में जल में डालकर रखें। सुबह उठकर थोड़ा-सा मसलकर छान लें।)

3. खुरासानी अजवायन 4 रत्ती, मीठी वच 4 रत्ती दोनों को पीसकर अनार के रस के साथ सेवन करने से हिस्टीरिया रोग में लाभ होता है।

4. नीबू का रस, सेंधा नमक, जीरा, भुनी हींग और पोदीना प्रत्येक को 3-3 ग्राम लेकर थोड़े-से उष्ण जल में मिलाकर पिलाने से रोग का प्रभाव कम होता है।

5. शुद्ध हींग एक रत्ती, गुड़ 4 रत्ती मिलाकर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाकर रख लें। सुबह-शाम एक-एक गोली जल के साथ सेवन करने से बहुत लाभ होता है |

6. ब्राह्मी, वचा और अगर प्रत्येक को 10-10 ग्राम मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण सुबह, 3 ग्राम चूर्ण शाम को त्रिफला के जल से सेवन करने पर हिस्टीरिया में बहुत लाभ होता है |

7. अम्लवेतस, पुष्कर मूल, हरीतकी, हींग, धनिया, सेवा, काला बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रखे| जौ को जल में उबालकर क्याथ बनाए और उसमें 5 ग्राम चूर्ण डालकर सेवन करें। इससे रोग जल्द नष्ट होता है।

8. केसर, वचा और पीपलामूत को 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। 5 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करने से रोग का प्रभाव कम होता है।

9. हींग 10 ग्राम, वचा 30 ग्राम, केसर 5 ग्राम, जटामांसी 40 ग्राम खुरासानी अजवायन 50 ग्राम लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखे। 3 ग्राम चूर्ण सुबह शाम को हल्के उण जत से सेवन करने पर रोग नस्ट होता है |

10. कूठ, मीठी बच, शंखपुष्पी, ब्राही सभी 25-25 ग्राम, मिसरी 120 ग्राम,केसर 5 ग्राम, सनाय 10 ग्राम कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं। 3 ग्राम चूर्ण जल से या गाय के दूध से लेने पर हिस्टीरिया में बहुत लाभ होता है।

11. मुनक्का के 6 दाने दूध में उबालकर मिसरी मिलाकर रोगी युवती को खिलाने व दूध पिलाने से बहुत लाभ होता है।

12. हिस्टीरिया में बेहोश युवती की नाक में लहसुन के रस को एक-एक बह डालने से तुरंत होश आता है। हींग व प्याज का रस भी बेहोशी नष्ट करते है।

13. प्रतिदिन आधा ग्राम से लेकर एक ग्राम (रोग और आयु के अनुसार) तक हीग खिलाने से हिस्टीरिया का रोगी सामान्य होने लगता है।

14. 100 ग्राम सलाद का रस निकालें। इसमें 5 ग्राम आंवले का रस मिलाकर रोगी को सुबह-शाम 30-35 दिनों तक पिलाएं। हिस्टीरिया के दौरे में लाभ होगा।

15. लौकी का गूदा निकलकर रोगी के सिर पर मलने से हिस्टीरिया का दौरा शीघ्र दूर हो जाता है।

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