यकृत वृद्धि (लीवर का बढ़ना ) | Hepatic enlargement in hindi

यकृत वृद्धि (लीवर का बढ़ना ) से बच्चे को बहुत पीड़ा होती है। यकृत वृद्धि का प्रारंभ में कुछ पता नहीं चलता जब रोग अधिक बढ़ जाता है और यकृत (जिगर) में पीड़ा होने लगती है तो उसकी चिकित्सा के लिए डॉक्टर के पास भागना पड़ जाता हैं।

यकृत वृद्धि (लीवर का बढ़ना ) क्यों होती है?

जिन बच्चों के खान-पान पर माता-पिता कुछ ध्यान नहीं रखते उन बच्चों की पाचन क्रिया विकृति होने से यकृत को बहुत हानि पहुंचती है कुछ बच्चों को बाजार की चटपटी मिर्च मसालों की चीजें खाने की बुरी आदत होती है | कुछ बच्चे हर समय कुछ ना कुछ खाते रहते हैं ऐसी स्थिति में यकृत को बहुत हानि पहुंचती है अधिक अमली रसों से बने और चाइनीस खाद्य पदार्थों के सेवन से उदर में अमृता अधिक बनने से यकृत में शोध की विकृत होती है यकृत में शोध होने से उसकी विधि होती है मलेरिया ज्वर से पीड़ित होने पर भी यकृत हो जाती है | मलेरिया रोग में भी यकृत को बहुत हानि होती है यकृत दूषित होने पर यकृत में शोध होता है रक्ताल्पता होने के कारण भी कुछ बच्चे यकृत विधि से पीड़ित होते हैं यकृत वृद्धि होने पर थोड़ा सा दबाकर देखने पर यकृत में पीड़ा होती है यकृत वृद्धि होने पर रोगी बच्चे अजीण,कब्ज और अतिसार से पीड़ित होते हैं भूख भी नष्ट हो जाती है और किसी भोजन में स्वाद नहीं आता है|

गुणकारी घरेलू नुक्से

1. भांगरे के रस में थोड़ी – सी अजवायन का चूर्ण मिलाकर जल के साथ रोगी बच्चे को सेवन कराने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है |

2.यकृत वृद्धि होने पर छोटी पिप्पली को जल के साथ घिसकर उसमें थोड़ा सा मधु मिलाकर चटाने से बहुत लाभ होता है रोगी बच्चे को दिन में दो बार अवश्य सेवन कराना चाहिए |

3.रोगी बच्चे को खीरे का सलाद बनाकर उसमें नींबू का रस पुदीने के रस की कुछ बूंदें डालकर और काला नमक मिलाकर खिलाने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है |

4.नीम की 10 ग्राम छाल को जल में उबालकर कवाथ बनाएं| उस कवाथ को कपड़े द्वारा छानकर, उसमें मधु मिलाकर सुबह-शाम रोगी को सेवन कराने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है |

5.जामुन के कोमल पत्तों का अर्क निकालकर 5 ग्राम अर्क कुछ दिनों तक पीने से यकृत वृद्धि का निवारण होता है |

6.यकृत वृद्धि में रोगी बच्चे को बार बार व्मन हो तो पुदीने के अर्क में, नींबू का रस मिलाकर, जल में डालकर पिलाने से बहुत लाभ होता है |

7.भांगरे के 5 ग्राम रस में अजवायन का आधा ग्राम चूर्ण मिलाकर पिलाने से यकृत विधि नष्ट होती है |

8.मकोय का रस निकालकर यकृत के ऊपर लेप करने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है |

9.हरी मकोय का रस, गुलाब के फूल और अमलतास का गूदा, तीनों को पीसकर यकृत कर पर लेप करने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है |

10.रात को 300 ग्राम जल में 5 ग्राम चूना डालकर रखें प्रात उठकर चुने के जल को ऊपर से निकालकर, कपड़े द्वारा छानकर 10 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम पिलाने से बहुत लाभ होता है |

11. पिप्पली को कूट पीसकर , कपड़े से छानकर चूर्ण बना लें उसमें 2 रत्ती मधु मिलाकर सुबह-शाम चटाने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है|

12.सुबह-शाम आधा ग्राम वंशलोचन में मधु मिलाकर चटाने या खिलाने से यकृत वृद्धि में बहुत लाभ होता है|

 

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