हरड़ के फायदे/ harad ke fayde

हरड़ के बारे में कहा जाता है कि जिस घर में हरड़ होती है वहां डॉक्टर नहीं आते हैं। अत्यधिक गुणों के कारण हरड को अनेक नामों से संबोधित किया जाता है संस्कृत में हरड को हरीतकी, अभया, रक्तास्था ,अमृता, नंदिनी, रोहिणी, जीवंती, श्रेयासी , गिरिजा आदि नामों से संबोधित किया जाता है सभी रोग को नष्ट करने के कारण हरड को “हरीतकी ” कहा जाता है हरड़ का नाम “प्रमथा ” भी है इसका अर्थ है लोगों को मथकर उन्हें जड़ मूल से नष्ट करने वाली | हरड़ का एक नाम वय ःस्था भी है इसका अर्थ होता है आयु को दीर्घ और स्थिर रखने वाली| मध्य प्रदेश , हिमाचल प्रदेश , उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश , उड़ीसा , बिहार और दक्षिण भारत में हरड़ बहुतायत से होती है असम में सबसे अधिक हरड़ होती है हिमाचल की घाटियों में वन प्रदेशों में हरड़ के वृक्ष बहुतायत से होते हैं हरड़ के बीजों का घेरा 8 से 10 फुट तक फैला होता है।

आयुर्वेद चिकित्सा के विभिन्न ग्रंथों में विस्तृत रूप से हरड़ के गुणों का वर्णन किया गया है विशेषज्ञों के अनुसार हरड़ में लवण रस को छोड़कर शेष सभी रस होते हैं हरड़ , लघु, दीपन, पाचन गुणों से युक्त दीर्घायु प्रदान करने वाली पुष्टिकारक, बुद्धि को विकसित करने वाली होती है हरड़ अपने मधुर , तिक्त एवं कषाय रस के कारण पित्त को तिक्त और कषाय रस के कारण कफ को तथा अम्ल व मधुर रस के कारण वायु विकारों को नष्ट करती है।

गुणकारी औषधि उपयोग

1. हरड़ को चबाकर खाने से अग्नि विकसित होने से भोजन की पाचन क्रिया प्रबल होती है।

2.हरड़ को पीसकर खाने से कोष्ठबाध्यता का निवारण होता है हरड़ मलों का शोधन करके निष्कासित करती है |

3.हरड़ को उबालकर सेवन करने से अतिसार में मल का अवरोध होता है घी में भूनकर हरड़ को सेवन करने से वात विकार नष्ट होते हैं |

4.हरड़ के सेवन से वात , पित्त और कफ बिकृति से उत्पन्न रोग विकार का निवारण होता है |

5.नपुंसकता , शरीर की शिथिलता और स्मरणशक्ति की क्षीणता में हरड़ के सेवन से बहुत लाभ होता है हरड़ नेत्रों के लिए बहुत गुणकारी होती है |

6.कुष्ठ, सोथ (सूजन ) उदर रोग ग्रहणी , अत्रकिर्मी ,प्रमेह ,अर्श ,सांस रोग व खांसी में बहुत लाभप्रद होती है | हरड़ के सेवन से उच्च रक्तचाप में बहुत लाभ होता है |

7.हरड़ , बहेड़े और आवालो को कूट पीसकर बनाए गए “त्रिफला चूर्ण ” के सेवन से कोष्ठबाध्यता नष्ट होती है |

8.हरड़ बहेड़े और आवलों को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें इस चूर्ण को त्रिफला चूर्ण कहते हैं रात्रि को 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गर्म जल या दूध के साथ सेवन करने से सुबह कोस्ट बंधता नष्ट होती है।

9. 7 – 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण रात को जल में डालकर रखें प्रातः उठकर उसको थोड़ा सा मसलकर कपड़े द्वारा छानकर उस जल से नेत्रों को स्वच्छ करने से नेत्रों के रोग विकार नष्ट होते हैं और ज्योति तीव्र होती है।

10.हरड़ मी ब्रांड को नष्ट करने और जीवाणु के संक्रमण को रोकने की बहुत क्षमता होती है|

11.हरड़ को जलाकर उसको पीसकर उसमें वेसलीन मिलाकर व्रण पर लगाने से बहुत लाभ होता है रात्रि को सोने से पहले हरण का मुरब्बा खाकर दूध पीने से सुबह उठने पर सोच खुलकर होती है ।

12. 3 ग्राम हरड़ का चूर्ण सुबह-शाम हल्के गर्म जल के साथ सेवन करने से कोष्ठबाध्यता नष्ट होने से बवासीर रोग में बहुत लाभ होता है ।

13. हरड़ को गोमूत्र में पकाकर कूट पीसकर सेवन करने से कब्ज विकृति से उत्पन्न रोग विकार नष्ट होते हैं।

14.मूत्र त्याग के समय पीड़ा होने पर हरड़ के 3 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर चाट कर खाने से बहुत लाभ होता है ।

15.हरड़ के चूर्ण को मट्ठे के साथ प्रतिदिन सेवन करने से मूत्र संस्थान के विभिन्न रोग नष्ट होते हैं ।

16.हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम और गुड़ मिलाकर सेवन करने से पेट में वायु गोला की विकृत नष्ट होती है।

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