गर्भावस्था में उल्टियां आने के कारण और उपचार : Gravstha Me Ultiya Ane Ke Karan Aur Upchar

गर्भावस्था में उल्टियां आने के कारण

उल्टी होना गर्भधारण करने अथवा गर्भावस्था का प्रमुख लक्षण हैं। वस्तुतः गर्भाशय में शिशु की उपस्थिति के कारण पेट पर दबाव पड़ने से उल्टी होती है। गर्भाधान होने पर प्रारंभ के दो-तीन माह तक गर्भिणी का जी मिचलाता रहता हैं। इस समय उल्टी के साथ-साथ गर्भावती स्त्री को दस्त पेचिश भी अधिक मात्रा में आता है। गर्भावस्था की उल्टी कोई रोग नहीं बल्कि गर्भावस्था का प्राकृतिक लक्षण मात्र है और इसे रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हां, इतना जरूर है कि इस समय अधिक तैलीय व चटपटे भोजन से परहेज करना चाहिए।

उपचार

आंवला : गर्भावस्था में यदि उल्टियां हो रही हो तो आंवले का सेवन काफी लाभदायक है। इसके लिए आंवले का मुरब्बा बना लीजिए तथा दो – दो आंवले प्रतिदिन चार बार खाएं। इससे गर्भावस्था की उल्टियां बंद हो जाएंगी तथा काफी आराम मिलेगा।

आम : यदि आम का मौसम हो तो पके हुई मीठे आम लाकर गर्भिणी को चूसने को दें, आम का रस भी निकाल कर पिलाया जा सकता है। इससे उल्टियां तुरंत बंद हो जाएंगी।

संतरा : संतरे का 25 ग्राम रस लेकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर गर्भिणी को दो – दो घूंट  पिलाएं। इससे उल्टियां तुरंत बंद हो जाएंगी।

बेल : बेल का कच्चा फल तोड़कर 2-3 ग्राम की मात्रा में दिन में दो-तीन बार लेते रहना चाहिए। गर्भिणी को उल्टी की शिकायत अधिकतर सुबह उठने पर होती है। सुबह ही बेल का गूदा खा लेने से आंंते खाली नहीं रहेंगी और यह शिकायत भी जाती रहेगी। यदि इच्छा हो तो इसमें मिश्री मिलाकर भी ले सकती हैं।

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