गर्भावस्था में भोजन के उपचार : Grabhvastha Me Bhojan Ke Upchar

गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि पूरे 9 माह तक ऐसा आहार विहार करें कि वह किसी व्याधि से ग्रस्त न होने पाए और उसका तथा गर्भास्थ शिशु का स्वास्थ्य अच्छा रहे, शरीर का समुचित विकास होता रहे तथा गर्भवती महिला शरीर से इतनी सक्षम तथा शक्तिशाली रहें कि उचित समय पर स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके।

उपचार

नारंगी : गर्भावस्था के दौरान नित्य दो नारंगी दोपहर के समय खानी चाहिए। यह उपचार पूरे गर्भकाल के दौरान करें। इससे सुंदर शिशु पैदा होता है।

मौसमी : गर्भवती स्त्री को कैल्शियम की काफी मात्रा में जरूरत होती है जो मौसम में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

नारियल : गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री को नियमित कच्चा नारियल खाना चाहिए। इससे गर्भस्थ शिशु पर अच्छा असर पड़ता है तथा उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है।

मूंगफली : गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री को 50 – 60 ग्राम मूंगफली प्रतिदिन खानी चाहिए।

गाजर : मौसमी की ही भांति गाजर मे भी प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है। गर्भावस्था में नित्य एक गिलास गाजर का रस पिएं। इससे गर्भावस्था में होने वाला सेप्सिस नामक रोग नहीं होता। साथ ही माता के दूध की गुणवत्ता में व्यापक वृद्धि होती है। चिकित्सकों का तो यहां तक का मानना है कि यदि गर्भावस्था में नियमित एक गिलास गाजर का रस पिया जाए तो कैल्शियम की गोलियां लेने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

इलायची : कुछ चिकित्सकों का मत है कि गर्भावती महिलाओं को इलायची का काढा़ देने से उनका पेट ज्यादा नहीं निकालता तथा स्तनों में व्याप्त दुग्ध की सफाई हो जाती है। साथ ही गर्भस्थ शिशु मां की बीमारी से पूर्णतया मुक्त रहता है।

सिंघाड़ा : गर्भावस्था के दौरान कच्चे सिंघाड़ो का सेवन करने से गर्भशय को शक्ति मिलती है।

 

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