अदरक के फायदे /Ginger benefits in hindi

अदरक का सेवन विभिन्न सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है अदरक के सेवन से पाचन क्रिया तीव्र होने से सब कुछ खाया हुआ जल्दी पच जाता है अदरक के सेवन से कफ और वायु के विकार शीघ्रता से नष्ट होते हैं रेतीली जमीन पर अदरक की उत्पत्ति जाती है अदरक जमीन के भीतर कंद के रूप में उत्पन्न होता है जमीन के ऊपर अदरक के हरे हरे पत्ते दिखाई देते हैं जमीन के भीतर के रूप में अदरक विकसित होता है यात्रियों को सुखाकर सूट बनाई जाती है तो टीम में भी अदरक के समान पोस्टिक गुण होते हैं लेकिन अदरक अधिक लाभ पहुंचाता है नींबू के रस में अदरक को बारीक कतर कर डालकर खाने से पाचन क्रिया तीव्र होती है और वायु विकार भी नष्ट होते हैं और दूसरे संधू और स्कूलों में अदरक का रस बहुत लाभकारी होता है चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शीतल मधुर हल्का चटपटा अग्नि दीपक रूठना खांसी को नष्ट करने वाला होता है वायु विकार वमन विकार को श्रद्धा और स्थल के रोग विकारों में अदरक बहुत लाभ पहुंचाता है जलोदर रोग में अदरक के सेवन से बहुत लाभ होता है अदरक का रस में आहार के पाचन में बहुत लाभ दायक होता है अदरक की चटनी बनाकर खाने से होती है और अधिक भूख लगती है और रोगों में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए स्त्री पुरुषों को भी अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए।

गुणकारी औषधि उपयोग

1.कास( खासी) व गले कि खरास के बिकार अदरक के सेवन से शीघ्र खतम होते है |

2.शीत ऋतु में कफ बिकृति के कारण गले में खराश की उत्पत्ति होने पर अदरक के 7 से 8 ग्राम रस में मधु मिलाकर चाट कर खाने से बहुत लाभ होता है | खांसी का प्रकोप भी कम होता है |

3.माइग्रेन की विकृति होने पर नाक में अदरक के रस की बूंदे टपकाने से बहुत लाभ होता है |

4.ताजा अदरक और नींबू का रस 5 ग्राम लेकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर भोजन से पहले सेवन करने से अपच की विकृत नष्ट होती है और वायु विकार नष्ट होता है |

5.10 ग्राम अदरक के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कटिशूल और गृघ्रासी शूल (साइटिका ) में बहुत लाभ होता है |

6.अदरक के 10 ग्राम रस में 50 ग्राम मधु मिलाकर दिन में तीन चार बार काट कर खाने से सर्दी जुकाम से उत्पन्न खांसी नष्ट होती है डॉक्टरों के अनुसार अस्थमा के कारण उत्पन्न खांसी में भी अदरक से लाभ होता है|

7.तीव्र होने पर 5 ग्राम अदरक के रस में 5 ग्राम मधु मिलाकर चाट कर खाने से बेचैनी और उसद्रता नष्ट होती है |

8.अदरक का रस 500 ग्राम और 250 ग्राम तिल का तेल दोनों को देर तक आग पर पकाएं जब रस जलकर नष्ट हो जाए तो तेल को छानकर रखें इस तेल की मालिश करने से जोड़ों की सूजन में बहुत लाभ होता है |अदरक के रस में नारियल का तेल भी पका का इस्तेमाल कर सकते हैं |

9.अदरक का रस हल्का गर्म करके बूंद बूंद कान में डालने से बहरापन नष्ट होता है |

10.अदरक के रस को गर्म जल में मिलाकर नमक डालकर गरारे करने से इन्फ्लुएंजा व सर्दी से कंठशोथ की विकृत में बहुत लाभ होता है |

11.प्रतिदिन सुबह शाम 5 से 10 ग्राम मात्रा में अदरक का रस जल में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है |

12.शीत ऋतु में बार-बार मूत्र के लिए जाने से परेशानी होने पर 10 ग्राम अदरक के रस में थोड़ा-सा मधु मिलाकर सेवन करने से बहुत लाभ होता है|

13.अदरक और प्याज का रस 5-5 ग्राम मात्रा में मिलाकर सेवन करने से वमन विकृत नष्ट होती है |

14.अदरक का रस पुदीने के साथ में डालकर पीने से बुखार ठीक होता है|

15.शीत ऋतु में स्वरभंग अर्थात आवाज बैठने की विकृत होने पर अदरक के रस में सेंधा नमक मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है |

16.अदरक को पीसकर संधिशोथ पर लेप करने से शोथ और शूल शीघ्र  नष्ट होते हैं |

17.अदरक के 1 लीटर रस में 100 ग्राम चीनी मिलाकर पकाएं जब मिश्रण कुछ गाढ़ा हो जाए तो उसमें लौंग का चूर्ण 5 ग्राम और छोटी इलायची का चूर्ण मिलाकर शीशे के बर्तन में भरकर रखें एक चम्मच दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पाचन संबंधी विकृत होती है |

18.अदरक का टुकड़ा मुंह में डालकर चूसें हिचकी बंद होती है |

19.अदरक 3 माशा , मिश्री 6 माशा, काली मिर्ची 5 दाने तीनो को थोड़ा सा कूटकर 3 छटाक मिश्रण को लगभग 30 ग्राम जल में पकाकर काढ़ा बनाएं इस काढ़े को छानकर पीने से जुकाम ठीक होता है |

20.अदरक का रस 5 ग्राम मात्रा में 100 ग्राम अनार रस में मिलाकर कुछ दिनों तक सुबह शाम सेवन करने से अम्लपित कि बिकृति ख़तम होती है|

21.वायु बिकार के कारण अंडकोष वृद्धि होने पर अदरक के 5 ग्राम रस में मधु मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से बहुत लाभ होता है |

22. वक्षस्थल में जलन होने पर गन्ने के 250 ग्राम रस में अदरक का रस और पुदीने की पत्तियों का रस 8 -8 ग्राम मिलाकर सेवन करें |

23.अदरक का रस मधु मिलाकर चाटने से शीतपित्त की विकृत नष्ट होती है|

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