पित्ताशय (गालब्लैडर) में पथरी | Gall bladder stones problems in hindi

स्थल स्त्री-पुरुष पित्ताशय अर्थात गालब्लैडर में पथरी (स्टोन) होने की विकृति से पीडित होते हैं। पित्ताशय में पथरी होने पर रोगी को अत्यधिक पीड़ा होती है । तीव्र शूल की अधिकता से रोगी तड़प उठता है। पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियां पित्ताशय की पथरी से अधिक रोगग्रस्त होती हैं।

पित्ताशय में पथरी की उत्पत्ति कैसे होती है?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार जब अधिक वसायुक्त अर्थात घी, मक्खन, तेल आदि से निर्मित खाद्य-पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं तो शरीर में कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम फॉस्फेट के अधिक बनने से पित्ताशय में पथरी का निर्माण होता है। रक्त विकृति के कारण छोटे बच्चों के शरीर में भी पथरी बन सकती है। पित्ताशय में पथरी की विकृति से स्त्रियां अधिक पीड़ित होती हैं। 30 वर्ष से अधिक आयु की स्त्रियां गर्भधारण के बाद पित्ताशय की पथरी से अधिक रोगग्रस्त होती हैं। कुछ स्त्रियों में पित्ताशय की पथरी का रोग वंशानुगत भी होता है। रक्त में कोलेस्ट्रोल की मात्रा अधिक होने पर कैल्शियम के मिलने से पथरी बनने लगती है।
पित्ताशय में जब तक पथरी शांत पड़ी रहती है तो रोगी को उसका कुछ पता नहीं चलता है। भोजन में अधिक वसायुक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन करने से पथरी बढ़ती जाती है। जब पथरी पित्ताशय की पित्त निष्कासित करने वाली नली में अवरोध उत्पन्न करती है तो तीव्र शूल की उत्पत्ति होने से रोगी को पथरी का अनुभव होता है। एक्स-रे कराने से पथरी के आकार का पता चलता है।
पित्ताशय में पथरी होने पर पहले रोगी के आमाशयिक प्रदेश में शूल होता है। शूल की लहर कमर तक पहुंच जाती है और फिर दाएं कंधे में शूल का अनुभव होता है। पित्ताशय की पथरी के कारण पित्त नली में अवरोध के कारण शोथ की उत्पत्ति भी होती है |
पथरी के कारण रोगी का जी मिचलाता है और वमन भी होती है। भोजन करने के बाद शूल की अधिक उत्पत्ति होती है। रोगी तेज ज्वर व कंपकंपी से पीड़ित हो सकता है। पित्ताशय की पथरी में रोगी को पीलिया रोग होने की अधिक संभावना रहती है।’

गुणकारी घरेलु नुस्खे

1. गोखरू के बीजों के चूर्ण को मधु के साथ भेड़ के दूध में मिलाकर पिलाने से पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।

2. सोठ का चूर्ण 5 ग्राम प्रतिदिन हल्के उष्ण जल के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से पथरी के शूल में आराम मिलता है।

3. वरुण वृक्ष की छाल का क्वाथ पिलाने से पित्ताशय की पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।

4. इंदायण की जड़ और कुलथी का क्वाथ बनाकर पीने से पथरी की विकृति में बहुत लाभ होता है।

5. प्रतिदिन 250 ग्राम गाजर का रस पीने से पथरी धीरे-धीरे नष्ट होती है।

6. वरुण की छाल, सोंठ, गोखरू का क्वाथ बनाकर पीने से पथरी नष्ट होती है।

7. कड़वी तुंबी (पकी हुई) का रस और यवक्षार मिलाकर मिसरी डालकर पीने से पथरी नष्ट होती है।

8. सोंठ, वरुण की छाल, रेड़ के पत्ते और गोखरू का क्वाथ बनाकर प्रातः सेवन करने से पथरी शीघ्र नष्ट होती है।

9. केले के वृक्ष के तने का रस थोड़ी-सी मिसरी मिलाकर पीने से कुछ दिनों में पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।

10. प्रतिदिन 200 ग्राम अंगूर का रस पीने या अंगूर खाने से पित्ताशय की पथरी में बहुत लाभ होता है।

11. कूष्माण्ड (सीताफल) के 25 ग्राम रस में सेंधा नमक मिलाकर प्रतिदिन पिलाने से पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।

12. केले के तने का रस 30 ग्राम, कलमी शोरा 25 ग्राम दूध में मिलाकर पिलाने से पथरी नष्ट होकर निष्कासित होती है

13. अरहर के पत्ते 6 माशे और संगेयहूद 4 रत्ती को बारीक पीसकर जल में मिलाकर पीने से पथरी में बहुत लाभ होता है

14. पित्ताशय में पथरी की विकृति होने पर रोगी को औषधि के सेवन से पहले कोष्ठबद्धता (कब्ज) को नष्ट करना चाहिए |

15. प्याज, लहसुन, सरसों, महुआ और सहजन की छाल को जल के साथ पीसकर, पित्ताशय के ऊपर लेप करने से शोथ और शूल का निवारण होता है।

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