गले मे छाले होने के कारण, लक्षण और उपचार : Gale Me Chhale Hone Ke Karan Lakshan Aur Upchar

गले में छाले के कारण

गले में छाले होना एक सामान्य रोग है जो किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है। यह रोग प्रायः जल जीवो के सेवन, तेज मसाले वाले भोजन के सेवन, अधिक तेल खाने व तले हुए खाद्य पदार्थों को खाने से होता है क्योंकि यह गरम पदार्थ गले की कोमल श्लेष्मिक कला में प्रदाह उत्पन्न कर देता है और गले में छाले हो जाते हैं। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है, उनको भी यह रोग घेर लेता है।

लक्षण

इस रोग में गले की दीवारों पर छोटी-छोटी सफेद फुंसियां  उभर जाती हैं। कुछ समय बाद यह फुंसियां लाल हो जाती हैं, जिनमें तेज जलन होती है तथा रोगी को सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है तथा खाद्य पदार्थों को निगलने में काफी परेशानी होने लगती है।

उपचार

गाजर : गाजर का रस प्रतिदिन दोपहर में पीने से गले में छाले नहीं होते। गाजर के रस को लगातार दो माह तक पीना चाहिए। गाजर के रस में दो चम्मच शहद या आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीने से गले के छाले ठीक हो जाते हैं।

गन्ना : गन्ने के रस को गर्म करके उसमें थोड़ा सा दूध मिलाकर पीने से गले के छाले समाप्त हो जाते हैं।

सिंघाड़ा : सिंघाड़े में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है। इसे खाने से गले में हुए छालों में काफी राहत मिलती है।

केला : दही में पका केला काटकर मिश्री मिलाएं और अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रहे केला गला हुआ तो ना हो किंतु पककर खूब गर्म हो चुका हो। इसे ठंडा करके खाइए। गले में छाले समाप्त हो जाएंगे।

शहतूत :  गले में छाले होने पर पानी में फिटकरी घोलकर गले के भीतर तक गरारे करें। पानी गर्म हो ताकि या ज्यादा असर करें। फिटकरी में विशेषता होती है कि यह छालों को व्यर्थ में फैलने और सूजने नहीं देती। इसके पश्चात शहतूत का रस पीजिए। गले के छालों को खत्म करने की शहतूत में प्राकृतिक शक्ति होती है।

सेव : गले में छाले होने पर नित्य सेव का रस पीना स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक रहता है।

 

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