गला बैठ जाने के कारण लक्षण और उपचार : Gala Baith Jane Ke Karan Lakshan Aur Upchar

गला बैठ जाने के कारण व लक्षण

ज्यादा तेज बोलना, गले का जरूरत से ज्यादा उपयोग, सर्दी लगने, वनस्पति घी व खराब तेल से बनी वस्तुओं का सेवन व अन्य शारीरिक विकारों की वजह से गला बैठ जाता है। गला बैठने या जमने से आवाज स्पष्ट नहीं निकलती या रोग की गंभीर अवस्था में आवाज निकलती ही नहीं है। इस रोग में गले में जलन व पीड़ा होने लगती है, बोलने, खाने पीने में किसी वस्तु को निगलने में परेशानी होती है।

उपचार

जामुन : जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना लें। दो-दो गोली प्रतिदिन चार पांच बार चूसें। इससे बैठा हुआ गला ठीक हो जाएगा।

शलगम : शलगम को पानी में उबालकर पानी को छान लें। तत्पश्चात इसमें स्वादानुसार शक्कर मिलाकर पीएं। गला ठीक हो जाएगा।

आंवला : पिसे हुए आंवले की पानी से फंकी लेने से किसी भी प्रकार का गला बैठा हो, सही हो जाता है।

अदरक : आधा चम्मच अदरक का रस आधे आधे घंटे के अंतराल में पीने से गला ठीक हो जाता है। परंतु यह ध्यान रखें कि अदरक का रस कुछ समय तक गले में रुकना चाहिए।

अदरक को हल्का गर्म करके चूसने से भी गला ठीक हो जाता है।

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