आंत्रकृमि के घरेलु उपचार | Endocrine Disorders in Hindi

दूषित खाद्य-पदार्थों और दूषित जल के सेवन से उदर में आंत्रकृमि के अंडे, लारवे आदि पहुंच जाने से आंत्रकृमि की विकृति होती है। उदर में पहुंचकर कृमि तेजी से विकसित होते हैं। कुछ कृमि आमाशय में रहते हैं। 10 मीटर तक लंबे कृमि कई वर्ष तक पेट में बढ़ते रहते हैं। ऐसे कृमियों को ‘केंचुए’ कहा जाता है। कई बार शौच के साथ केंचुए कृमि मलद्वार से निकल आते हैं। ऐसे कृमियों को खींचने से वे टूट जाते हैं।
आंत्रकृमि आमाशय से चलकर आंत्रों में पहुंच जाते हैं। इन कृमियों के मुंह की ओर अंकुश टाइप ‘हुक’ लगे होते हैं। इन हुकों की सहायता से आंत्रकमि आंत्रों में चिपके रहते हैं। आंत्रकृमि आंत्रों में चिपककर रक्तपान करते हैं। इनके काटने से आंत्रों में जख्म बन जाता है। मल के साथ रक्त भी निकलने लगता है। आंत्रकमि अधिक संख्या में विकसित होकर मल-मूत्र द्वारा विषक्रमण करते हैं। इन कृमियों के कारण रक्ताल्पता की विकृति होती है।
छोटे बच्चे धागे जैसे पतले अति सूक्ष्म कृमियों से बहुत पीड़ित रहते हैं। इन कृमिया को जन साधारण में ‘चुरने’ कहा जाता है। दूषित जल व दुसरी खाने-पीने की चाजात इन कृमियों की उत्पत्ति होती है। रात्रि के समय चुरने मलद्वार पर पहुंचकर काटते हैं तो बहुत खुजली होती है। चुरनों के काटने से मलद्वार लाल दिखाई देता है।
आंत्रकमियों के लंबे समय तक रक्तपान करने से रक्ताल्पता (एनेमिया ) की विकृति होती है। केंचुए के कारण रोगी बहुत कमजोर हो जाता है। एक से सीढ़ियां चढ़ने में बहुत घबराहट अनुभव करता है। रोगी को चक्कर आने । फेफड़ों और मस्तिष्क में पहुंचकर कृमि रोगी को बहुत हानि पहुंचाते हैं।

गुणकारी घरेलु नुस्खे |

1.अनार की छाल का क्वाथ बनाकर उसमें 1 ग्राम तिल का तेल मिलाकर सेवन करने से कृमि नष्ट होते हैं।

2.टमाटर को काटकर उसमें काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक मिलाकर खाने से कृमि नष्ट होते हैं। टमाटरों के रस में काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक मिलाकर पीने से भी लाभ होता है।

3.टमाटरों के सूप में वायविडंग का चूर्ण मिलाकर पीने से कृमि नष्ट होते हैं।

4.नीम की छाल को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर दो ग्राम चूर्ण हींग और मधु मिलाकर सेवन करने से कृमि नष्ट होते हैं|

5.लहसुन और गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर खिलाने से कृमि नष्ट होते हैं।

6.अजवायन का चूर्ण चार रत्ती, काला नमक दो रत्ती मिलाकर हल्के उष्ण जल के साथ सेवन करने से कृमियों से मुक्ति मिलती है। तक्र के साथ भी सेवन कर सकते हैं।

7.पलाश के बीजों का रस चावल के धोवन के जल के साथ पीने से कृमि नष्ट होते हैं। इस रस को मट्ठे के साथ भी सेवन करें।

8.प्याज के 10 ग्राम रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से कृमि नष्ट होते हैं।

9.आंत्रकृमियों को नष्ट करने के लिए सबसे गुणकारी औषधि है, कबीला । गुड़ के साथ 3 ग्राम कबीला हल्के उष्ण जल के साथ सेवन करने से अतिशीघ्र कृमि नष्ट होते हैं।

10.अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में गुड़ मिलाकर खिलाने से कृमि नष्ट हो जाते हैं। कृमिनाशक कोई औषधि देने के साथ कब्ज नष्ट करने वाली औषधि देने से कृमि नष्ट होकर मलद्वार से निकल जाते हैं।

11.हरड़, कबीला, सेंधा नमक और वायविडंग, सभी को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण तक्र (मठे) के साथ खिलाने से कृमि नष्ट होते हैं।

12.नीम के कोमल पत्तों का रस मधु मिलाकर सेवन कराने से कृमि और रक्त विकार नष्ट होते हैं।

13.बड़ी हरड़ का छिलका 10 ग्राम, वायविडंग 10 ग्राम, काला नमक 10 ग्राम को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 2 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम उष्ण जल से सेवन कराने पर कृमि नष्ट होते हैं। •अनन्नास के 20 ग्राम रस से अजवायन, वायविडंग का चूर्ण दो-दो ग्राम मिलाकर सेवन करने से कृमि नष्ट हो जाते हैं।

14.आडू के पत्तों का रस 30 ग्राम में थोड़ी-सी हींग मिलाकर पिलाने से कृमि नष्ट होते हैं। कच्चे आम की गुठली के अंदर के भाग का चूर्ण 4 रत्ती मात्रा में जल या दही के साथ सेवन कराने से कृमि नष्ट हो जाते हैं।

15.चम्पा के फूलों का रस 10 ग्राम मधु मिलाकर देने से कृमि नष्ट हो जाते हैं।

16.नारियल का छिलका पानी में उबालकर सुबह निराहार पीने से पेट के कीडे मरकर बाहर निकल जाते हैं।

17.जैतून का तेल पिलाने और गुदा में लगाने से बच्चों को चुनचुने मूत्र कृमि नहीं काटते। वे मूत्र कृमि नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।

18.हींग को अजवायन और ग्वारपाठा के गूदे के साथ देने पर आंत्रकृमि नष्ट हो जाते हैं।

19.सुबह जल्दी उठकर पहले थोड़ा-सा गुड़ खाएं। फिर कुछ देर बाद जल में खुरासानी अजवायन पीसकर, छानकर उस जल को पीने से पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं।

20.प्याज का रस पिलाने से छोटे बच्चों के पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *