दुर्बा घास के फायदे/ Durba ghas ke fyade in Hindi

घरों के बाहर लोन में मैदानों में और मिट्टी में दूब की उत्पत्ति अपने आप हो जाती है| पेड़ पौधों के बीच दूब की उत्पत्ति स्वाभाविक होती है दूब पशुओं को चारे के रूप में खिलाई जाती है।दूब के गुडो से परिचित नहीं होने के कारण अधिकांश व्यक्ति इसका सेवन नहीं कर पाते लेकिन वनस्पतिक विशेषज्ञों के अनुसार दूब में अनेक गुणकारी तत्व होते हैं जो विभिन्न रोग विकारों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं बगीचों में हरी घास पर नंगे पांव चलने से ग्रीष्म ऋतु की उत्सुकता नष्ट होती है और बिखरी हरी घास पर नंगे पांव चलने मात्र से नेत्र ज्योति तीव्र होती है और नेत्र को सुरक्षात्मक शक्ति मिलती है डॉक्टरों के अनुसार दुर्बा घाश स्वाद में कड़वी होती है लेकिन शरीर को भरपूर शीतलता प्रदान करती है दुर्बा के रस के सेवन से रक्त विकार नष्ट होते हैं।

शरीर की जलन विसर्प और ग्रीष्म ऋतु में तृष्णा का निवारण होता है गर्भ स्त्राव की विकृत में हरी दूब के रस से बहुत लाभ होता है दूब का रस कफ प्रकोप को नष्ट करता है स्त्रियों के श्वेत प्रदर रोग में दूब के रस से बहुत लाभ होता है गुर्दे में पथरी होने से प्रतिदिन दूब का सेवन सेवन करने से पथरी नष्ट होती है वमन विकृत में भी हरी दूब के रस से बहुत लाभ होता है दुर्बा घास में विटामिन “ए “और “सी ” पर्याप्त मात्रा में होता है दुर्बा के रस के सेवन से नेत्रों की ज्योति को बहुत लाभ पहुंचता है हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, व धनिया के साथ सलाद के रूप में दूब कि हरी कोमल पत्तियों का सेवन करने से अत्यधिक पौष्टिक तत्व शरीर को प्राप्त होता है

दूब का रस कपड़ों द्वारा छानकर बूंद-बूंद नेत्रों में डालने से उस्सेद्र्ता से उत्पन्न लालिमा नष्ट होती है दूब मस्तिस्क कि  निर्बलता को नष्ट करती है जलोदर, मिर्गी ,उन्माद, पैत्रिक वमन अधिक मात्रा में ऋतुस्त्राव होने पर दूब के रस के सेवन से बहुत लाभ होता है

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. दूब की जड़ के 1 ग्राम रस में मधु मिलाकर सेवन करने से हिचकी की विकृत नष्ट होती है |

2.रक्तपित्त की विकृत होने पर दूव को जल के साथ पीसकर उसे कपड़े में बांधकर निचोड़ कर उसका रस निकालें 15 मिलीलीटर रस प्रातः और सायं पीने से रक्तस्त्राव बंद होता है |

3.श्वेत दूध का रस 15 मिलीलीटर और कुशा की जड़ को पीसकर चावल के धोवन के साथ मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है | कुशा कि जड़ 5 ग्राम मात्रा में सेवन करें|

4.गुर्दे में पथरी होने पर दूब का रस 15 मिलीलीटर मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से पथरी धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है|

5.दूब को पीसकर अर्थ के मस्सों पर लेप करने से अंकुर शीघ्र नष्ट होते हैं |

6.दूव की जड़ को पीसकर दही में मिलाकर सेवन करने से मूत्रकृच्छ की विकृत नष्ट होती है |

7.स्वेत दूब और अनार की कली को रात में रखे जल में भीगे चावलों के साथ पीसकर 1 सप्ताह तक सेवन करने से  ऋतुस्त्राव का अवरोध नस्ट होता है |

8.दूब का रस जलोदर रोग से पीड़ित स्त्री पुरुष को पिलाने से अधिक मूत्र निष्कासित होने से रोगी को बहुत लाभ होता है|

9.दूब के रस में घिसा हुआ सफेद चंदन मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से स्त्रियों का रक्त प्रदर रोग नष्ट होता है |

10. दूव का रस बूद बूद नाक में टपकाने से नाक से रक्तस्त्राव कि विकृति में बहुत लाभ होता है |

11. दूब के रस में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से शरीर के विभिन्न सूजन में लाभ होता है |

12. दूब का रस तिल के तेल में मिलाकर शारीर पर मलने से और कुछ देर रुककर स्नान करने से खाज खुजली नस्ट होती है |

13.दूब की जड़ को पीसकर जल में मिलाकर थोड़ी सी मिश्री डालकर प्रतिदिन सेवन करने से पथरी नष्ट होती है |

नोट :- हरी दूब कोमल व ताजी ही लेनी चाहिए हरी दूव सदैव अच्छी मिट्टी वाली जगह से लेनी चाहिए जड़ की ओर से हरी दूब को काटकर स्वच्छ जल से धोने के बाद ही उसका सेवन करना चाहिए |

 

 

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