धड़कनें तेज होने के कारण, लक्षण और उपचार : Dankane Teja Hone Ke Karan Lakshan Aur Upchar

धड़कन तेज होने के कारण

ठंडे या गर्म पदार्थों के ज्यादा सेवन, मानसिक चिंता, भय, शोक, अत्यधिक क्रोध व दिनचार्य के विपरीत कार्य करने से हृदय की धड़कनें तेज हो जाती हैं। ज्वर, खांसी, हिचकी, ब्लड प्रेशर के कारण भी यह रोग हो सकता है।

लक्षण

इस रोग मे हृदय में दर्द तथा भारीपन का अनुभव होता है। मुंह सूख जाता है, रोगी को तेजी से पसीना व चक्कर आने लग जाते हैं। बेचैनी व आलस्य के लक्षण दिखाई देते है।

उपचार

पिस्ता : पिस्ते में विटामिन ई की पर्याप्त मात्रा होती है जो हृदय की धड़कनों को सामान्य कर देती है। धड़कनें तेज होने पर पिस्ते का प्रयोग करें।

अंगूर : अंगूर में हृदय रोगों को ठीक करने का चमत्कारी गुण होता है। इसके नियमित प्रयोग से हृदय रोग नहीं होते। हृदय की धड़कनें तेज होने पर तुरंत अंगूर का रस पीएं। तत्काल प्रभाव होगा तथा हृदय की धड़कनें सामान्य हो जाएंगी और घबराहट भी दूर हो जाएगी।

गाजर : हृदय की धड़कने बढ़ने के रोग में गाजर लाभकारी है। हृदय की दुर्बलता को दूर करने के लिए नित्य दो गाजर का रस पीएं।

फालसा : पके हुए फालसे का रस पीने से काफी लाभ होता है। हृदय की धड़कने असामान्य होने पर फालसे के रस में सोंंठ शक्कर मिलाकर पीएं।

केला :  असामान्य धड़कने होने पर केला खाने से लाभ होता है।

अनार : अनार का रस पीने से धड़कने ठीक हो जाती हैं।

खजूर : खजूर के सेवन से भी हृदय की धड़कनें ठीक हो जाती है।

बेल : पके हुए बेल का गूदा मलाई के साथ खाते रहने से हृदय की धड़कनें सामान्य रहती हैं।

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