बिवाई फटने के कारण, लक्षण और उपचार : Bivai Phatne Ke Karan Lakshan Aur Upchar

बिवाई फटने के कारण

‘ जाके पांव न फटे बिवाई , वो क्या जाने पीर पराई ‘- सदियों से किसी व्यक्ति के दुख सहने की क्षमता को परिलक्षित करने के लिए प्रयोग में लिया जाने वाला मुहावरा है। वस्तुतः यह रोग अधिक दौड़ भाग करने, धूप में नंगे पांव चलने, ज्यादा गर्मी में रहने, त्वचा के संक्रमण व अत्यधिक श्रम करने से होते हैं।

लक्षण

यह रोग पांवों के पंजों में होता है। इसमें सबसे पहले एड़ियों व उसके आसपास की त्वचा में छोटी-छोटी दरारें पैदा हो जाती हैं, जो धीरे-धीरे गहरी होती जाती हैं तथा उनसे रक्त निकलने लगता है। रोग की गंभीर अवस्था में रोगी का पैदल चलना मुश्किल हो जाता है तथा बिवाई में दर्द होने लगता है।

उपचार

शलगम : शलगम को उबालकर उसके पानी में बिवाइयों को आहिस्ता आहिस्ता धोएं, फिर बिवाइयों पर कपड़ा लपेट दे या पट्टी बांध दें। इससे बिवाइयां ठीक हो जाती है। तथा सुकोमल व सुंदर हो एड़ियां निखर जाती हैं।

अरंडी : पैरों को अच्छी तरह गर्म पानी में धो ले, फिर उस पर अरंडी का तेल रगड़ दे, इससे बिवाईयांं फटना बंद हो जाती हैं।

कायफल : कायफल को सिल पर पीसकर एड़ी पर लेप करने से बिवाईयां नहीं फटतींं।

नींबू : नींबू को काटकर बिवाइयों पर रगड़ने से लाभ होता है। इससे एड़ियों की त्वचा में भी निखार आती है तथा उनकी चमक भी बढ़ जाती है।

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