काली खाँसी के फायदे | Benefits of whooping cough in hindi

काली खांसी रोग में जोर-जोर से देर तक खांसी उठती है निरंतर खांसने से रोगी घबरा जाता है अंत में उसे वमन हो जाती है वमन होने के बाद रोगी को कुछ आराम मिलता है लेकिन कुछ देर के बाद हंसते बोलते या कुछ खाते पीते ही रोगी को फिर खांसी उठने लगती है निरंतर खासने के बाद रोगी को वमन होने पर खांसी कुछ देर के लिए बंद हो जाती है काली खांसी की उत्पत्ति हीमोफाइलस परटुसिस जीवाणुओं के संक्रमण से होती है रोग के जीवाणु रोगी बच्चे की नाक और मुंह में छिपे रहते हैं जब रोगी बच्चे जोर से खासते और छीकते हैं तो रोक के सूक्ष्म जीवाणु वायु में फ़ैलकर दूसरे स्वास्थ्य बच्चे तक पहुंच जाते हैं रोगी बच्चे के साथ बातें करने, उसके स्पर्श की चीजें स्पर्श करने और उसके साथ खाने पीने से रोग के जीवाणु दूसरे स्वस्थ बच्चे पर संक्रमण करके उसे भी रोगी बना देते हैं काली खांसी बहुत संक्रामक रोग है कक्षा में किसी एक बच्चे को यह रोग होने पर दूसरे अनेक बच्चे भी इस रोग के शिकार बन जाते हैं घर में किसी एक बच्चे को काली खांसी होने पर दूसरे बच्चों को उससे अलग रखना चाहिए उसके जूठे बर्तनों से दूसरे स्वस्थ बच्चों को कुछ खाने पीने ना दे|

 

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. सुहागा, कलमी शोरा, फिटकरी, सेंधा नमक और यौछार को कूट पीसकर आग पर तवा रखकर चूर्ण को भून कर 2- 2 ग्राम मात्रा में मधु मिलाकर बच्चे को चढ़ाने से काली खांसी का प्रकोप शांत होता है|

2. पीपल, काकड़ा सिंगी, अतीस और बहेड़ा, सभी औषधियां 20 – 20 ग्राम मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर, कपड़े से छानकर रखें इसमें नौसादर 10 ग्राम और भुना हुआ सुहागा 10 ग्राम मिलाकर किसी खरल में पीस ले | 3 ग्राम चूर्ण मधु मिलाकर, दिन में दो से तीन बार चटाने से काली खाशी नष्ट होती है|

3. किसी बड़े पात्र में जल उबाले| जल को उबालकर उसे आग से उतारकर यूकलिप्टस आयल की दो से तीन बूंदें डालकर उसकी भाप में सांस लें | भाप से नाक व मुंह में छिपे जीवाणु नष्ट होते हैं और काली खांसी का रोग नष्ट होता है|

4. अडूसे के सूखे पत्तों को मिट्टी के पात्र में रखकर आग पर गर्म करके भस्म बना लें उस भस्म को 2 से 3 रत्ती मात्रा में लेकर मधु मिलाकर चटाने से काली खांसी का प्रकोप शांत होता है|

5.  3 ग्राम नारियल का तेल हल्का गर्म करके रोगी बच्चे को पिलाने से खांसी का प्रकोप कम होता है|

6. मोर के पंखों के ऊपर के चंद्र भाग को काटकर किसी मिट्टी के पात्र में भरकर रखें | फिर उस पात्र का मुंह बंद करके पात्र को उपलों की तेज आग में गरम करें| आग में करने से मोर के पंख जलकर भस्म हो जाएंगे अब उस पात्र को आग से निकालकर भस्म में भुना हुआ सुहागा मिलाकर खरल में पीस लें| 2 – 3 रत्ती भस्म मधु मिलाकर ,दिन में कई बार चटाने से काली खांसी नष्ट होती है|

7. अदरक का रस और मधु मिलाकर दिन में दो से तीन बार चटाने से काली खांसी का प्रकोप नष्ट होता है|

8. तीन बादाम रात को जल में डालकर रख दें प्रातः उठकर बादाम के छिलके उतारकर लहसुन की एक कली और मिश्री मिलाकर पीस लें इस मिश्रण को रोगी बच्चे को खिलाने से काली खांसी का निवारण होता है|

9. आग पर तवा रखकर लौंग को भून ले, फिर उस लौंग को पीसकर उसमे मधु मिलाकर चटाने से काली खांसी का प्रकोप शांत होता है|

10. सितोपलादि चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में लेकर उसमे मधु मिलाकर दिन में 2 से 3 बार चटाने से काली खांसी का प्रकोप कम हो जाता है|

11. तुलसी के पत्तों के 3 ग्राम रस में मधु मिलाकर चटाने से काली खांसी में बहुत लाभ होता है |

12. तवे पर भुना हुआ सुहागा और वंशलोचन मिलाकर मधु के साथ देने से बच्चे को चटाने से काली खांसी नष्ट होती है|

13. काली खांसी होने पर बच्चे को बिस्तर पर सुलाने से पहले उनकी छाती और कमर पर कपूर को तेल में मिलाकर मालिश करने से काली खांसी का प्रकोप शांत होता है|

14. पान के पत्तों के 3 ग्राम रस में मधु मिलाकर दिन में 1 बार चटाने से काली खांसी में बहुत लाभ होता है|

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