उदरशूल के लक्षण व उपचार/ Baby Colic Symptoms And Tips

छोटे बच्चे विभिन्न कारणों से उदर शूल (पेट का दर्द ) पीड़ित होते हैं अल्प आयु के शिशु मां द्वारा अधिक शीतल व गरम खाद्य पदार्थों का सेवन करने से उदरशूल (पेट का दर्द ) से पीड़ित होते हैं| स्त्रियाँ जब अधिक शीतल पेय व खाद्य पदार्थों का सेवन करती हैं और बच्चे को स्तनपान कराती हैं तो सर्दी के कारण बच्चे के उदरशूल (पेट का दर्द ) होने लगते हैं जब कोई स्त्री अधिक गरिष्ठ व वात विकार उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थों तथा सब्जियों का सेवन करती हैं तो स्तनपान करने वाले शिशु उदरशूल (पेट का दर्द ) से पीड़ित होते हैं|

किशोर आयु के बच्चे घर से बाहर खुली रखी दूसरी चीजें खाते हैं तो उधर शूल से पीड़ित होते हैं गरिष्ठ तथा अधिक शीतल खाद्य पदार्थों के खाने से पेट में दर्द होता है कुछ बच्चे भोजन करने के बाद दौड़ने कूदने के खेल खेलते हैं तो उधर स्कूल के विकार होते हैं कुछ बच्चों में खाने की बुरी आदत होती है वह हर समय कुछ ना कुछ खाते पीते रहते हैं हर समय कुछ ना कुछ खाते रहने से पाचन क्रिया विकृत होती है और पेट में दर्द होने लगता है |

किसी स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों को अधिक मात्रा में खाने और सीधे बिस्तर पर लेट जाने से भी पेट में दर्द हो सकता है अनेक बच्चों को सुबह देर तक बिस्तर पर सोते रहने की बुरी आदत होती है सुबह उठकर समय पर सोच नहीं जाने से उदर में कोष्ठबद्धता बनी रहे तो पेट में दर्द होने लगता है । अम्लपित्त , उदर रोग में अधिक उदरशूल होता है कुछ बच्चे मिट्टी , सलेटी, व दूसरी गंदी चीजें खाते हैं इन दूषित चीजों के कारण पेट में दर्द होता है कुछ बच्चे के पेट में विभिन्न तरह के कीड़े होते हैं पेट में कीड़े होने के कारण भी दर्द की विकृत होती है

गुणकारी औषधीय उपयोग

1.वात विकार उत्पन्न करने वाले शीतल खाद्य पदार्थों का सेवन करने से उदर शूल होने पर बच्चे को एक चम्मच जल में हींग घोलकर पिलाने ऊपर से थोड़ा सा हल्का गर्म जल पिलाने से शूल नष्ट होता है ।

2. हींग को जल के साथ घोलकर नाभि के आसपास लेप करने से पेट का दर्द नष्ट होता है।

3.हरड को कूट-पीटकर चूर्ण बनाकर रखें 1 से 2 ग्राम मात्रा में हरड़ का चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ सेवन कराने से उदर शूल का निवारण होता है।

4.शिशु को सर्दी लगने या मां द्वारा शीतल खाद्य पदार्थों का सेवन करने पर उदर में शूल होने पर जायफल को जल के साथ पीसकर गर्म जल मिलाकर पिलाने से शूल नष्ट होता है।

5.अदरक के रस में काला नमक मिलाकर बच्चे को चटाने और ऊपर से हल्का गर्म जल पिलाने से उदर शूल नष्ट होता है ।

6. कोष्ठबद्धता के कारण उदर शूल होने पर रात्रि के समय 3 ग्राम त्रिफला का चूर्ण हल्के गर्म जल से सेवन कराने पर शूल नष्ट होता है ।

7.वायु विकार के कारण पेट में दर्द होने पर बच्चे को सोंठ का चूर्ण बनाकर उसमें थोड़ा सा काला नमक पीसकर मिलाकर 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल से सेवन कराने पर पेट का दर्द होता है ।

8.मैनफल को कांजी के साथ घिसकर फिर किसी पात्र में रखकर हल्का सा गर्म करके उदर पर नाभि के आसपास लेप करने करने से शूल नष्ट होता है।

9.राई को पीसकर उसमें थोड़ा सा हींग पीसकर मिलाकर जल मिलाकर नाभि के आसपास लेप करने से शीघ्र शूल नष्ट होता है।

10. 5 ग्राम प्याज के रस में थोड़ा सा काला नमक मिलाकर बच्चे को पिलाने पर पेट का दर्द नष्ट होता है ।

11. 5 ग्राम पुदीने के रस में 1 ग्राम अजवाइन का चूर्ण और थोड़ी सी हींग मिलाकर बच्चे को पिलाकर ऊपर से हल्का गर्म जल पिलाने से उदर शूल नष्ट होता है ।

12.एक छोटी इलायची को पीसकर मधु मिलाकर चटाने से उदर शूल नष्ट होता है ।

13.मूली के 10 ग्राम रस में सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पिलाने से उदर शूल नष्ट होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *