असंयमित मूत्रत्याग के कारण और उपचार : Asayamit Mutrtyag Ke Karan Aur Upchar

असंयमित मूत्रत्याग के कारण

बार बार पेशाब आना और असंयमित  मूत्रत्याग का ही दूसरा रूप है। बार बार पेशाब आना वृद्धावस्था में होने वाला रोग हैं क्योंकि वृद्धावस्था में शरीर की मांसपेशियों पर नियंत्रण धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके अलावा प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने तथा चाय व मद्यपान अधिक करने के कारण भी बार-बार पेशाब आने की शिकायत हो जाती है।

उपचार

अंगूर : अंगूर के सेवन से बार-बार पेशाब आने की हरारत में कमी आ जाती है।

केला : जिन्हें पेशाब बार बार आता है उन्हें दो पके हुए केले का सेवन दोपहर के भोजन के बाद कुछ दिनों तक नियमित करना चाहिए।

एक केले के साथ विदारीकंद और शतावरी का चूर्ण डेढ़ डेढ़ माशा मिलाकर दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से लाभ होता है।

अनार : 5 ग्राम अनार के छिलके की फांसी ताजा पानी में सुबह शाम लेने से अधिक मूत्र आना कम हो जाता है।

बेल : बेल के ताजे पत्ते का रस और 5 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार ले। पेशाब का बार बार आना ठीक हो जाएगा।

छुहारा : बूढ़े व्यक्ति बार-बार पेशाब जाते हो तो उन्हें नित्य दिन में दो बार छुुहारे का सेवन करना चाहिए व रात्रि को एक छुहारा खाकर दूध पीना चाहिए। रोग ठीक हो जाएगा।

आंवला : 2 – 3 आंवले का रस पानी में मिलाकर 4 दिन तक सुबह-शाम पीने से काफी लाभ होता है।

सेव : नियमित सेव खाने से बार – बार पेशाब आना कम हो जाता है।

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