अन्य शिशु रोग के उपचार : Anya Shishu Rog Ke Upchar

उपचार

मिट्टी खाना :  बच्चों को मिट्टी खाने की आदत हो तो आम की गुठली ताजा पानी से देना लाभदायक रहता है। गुठली को सेक कर उसे सुपारी की तरह बच्चों को दीजिए। इससे उसका मिट्टी खाना छूट जाएगा।

बच्चों की मिट्टी खाने की आदत पका हुआ केला और शहद मिलाकर खिलाने से छूट जाती हैं।

खांंसी : केले का फूल मधुर, शीतल व कृतिनाशक होता है। इसके सेवन से बच्चे की खांसी मिट जाती है।

शुद्ध किया नारियल का तेल 1 वर्ष के बच्चे को दिन में तीन बार 3 ग्राम मात्रा में पिलाने से खांसी ठीक हो जाती है।

ज्वर : कड़वे परवल, हरड़, आंवला, देशी नीम की गिरी तथा हल्दी को मिलाकर काढ़ा बनाकर बच्चे को पिलाने से ज्वर दूर हो जाता है।

रोना व डरना : पीपल और त्रिफला का चूर्ण शुद्ध देशी घी तथा शुद्ध शहद मिलाकर बच्चे को चटाने से उसका रोना व डरना कम हो जाता है।

फोड़े – फुंसी : आंवले की राख में शुद्ध घी मिलाकर लेप करने से बच्चों के फोड़े ठीक हो जाते है।

बलवर्धक : छोटे बच्चों के लिए संतरे का रस आदर्श भोजन हैं। यह उन बच्चों के लिए विशेष लाभदायक है जिनको माताएं अपना दूध नहीं पिलाती हैं।ऐसे बच्चों को नित्य एक कप संतरे का रस पिलाना चाहिए। इससे उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं तथा उनके शरीर को बल मिलता हैं। सूखा रोग से ग्रसित बच्चों को भी संतरे का रस हृष्ट – पुष्ट बना देता हैं।

नाभि पक जाना : कपड़ें को नारियल के तेल मे भिगोकर नाभि पर रख देने से नाभि का पकना ठीक हो जाता हैं

बच्चे का सूखना : संतरे के रस मे अंगूर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर बच्चों को एक एक कप करके दिन में दो – तीन बार पिलाने से कुछ ही सप्ताह में बच्चा हृष्ट – पुष्ट हो जाएगा।

यदि बच्चा स्वयं खाने योग्य हो तो उसे एक – दो खजूर शहद में भिगोकर खिला दीजिए। इस प्रकार दिनभर में 5 से 6 खजूर खिला दें। 10 – 15 दिनों में बच्चे का विकास तेजी से होने लगेगा। गर्मी का मौसम हो तो अकेले शहद का शरबत बनाकर पिलाएं।

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