अन्य रोग के कारण, लक्षण और उपचार : Anya Rog Ke Karan Lakshan Aur Upchar

श्वास नली रोग के उपचार

छुहारा : छुहारा गर्म प्रकृति का फल है। यह फेफड़ों और छाती के लिए बलवर्धक है। इसके नियमित सेवन से कफ व खांसी में लाभ होता है।

गाजर : गाजर व पालक का रस क्रमशः 310 व 125 ग्राम मिलाकर पीने से सांस नली की सूजन दूर हो जाती है।

ईसबगोल : नित्य ईसबगोल की भूसी की फंकी सुबह-शाम लेने से सांस की बीमारी समाप्त हो जाती है।

बादाम : गले में खराश और थोड़ी-थोड़ी खांसी आती हो तो संतरे या नींबू के रस में बदाम का चूर्ण मिलाकर दे, लाभ होगा।

सांस फूलना

नींबू : नींबू का रस शहद में मिलाकर चाटने से सांस फूलना बंद हो जाता है।

सांस लेने में कठिनाई

बेल के पत्तों को पीसकर तिल के तेल में उबाल लें। जब पत्ते पूरी तरह जल जाए तो ठंडा करके छानकर एक बोतल में भरकर रख लें। सोने से पूर्व इस तेल को सिर पर मलने से बार-बार होने वाले जुखाम दूर हो जाते हैं तथा सांस नियमित हो जाती है।

बेल के पत्ते का रस चाटने से सांस नली में जमा हुआ कफ निकल जाता है।

बेल के पत्तों के रस को गर्म पानी व कालीमिर्च के साथ मिलाकर पीने से सांस रोग में काफी लाभ होता है।

सांस की दुर्गन्ध

गाजर : गाजर, पालक, व खीरा, प्रत्येक का 125 ग्राम रस मिलाकर पीने से सांस में ताजगी आ जाती है व दुर्गन्ध समाप्त हो जाती है।

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