आंतों में रोग के कारण, लक्षण और उपचार : Anto Me Rog Ke Karan Lakshan Aur Upchar

आंतों में रोग के कारण व लक्षण

बिना चबाए भोजन निकलने वाले, लगातार कुछ न कुछ खाते रहनेवाले, पानी कम पीने वालों, चिकनाई का कम सेवन करने वालों का आंतों के रोग की चपेट में आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ज्यादा गरिष्ठ का भोजन आंतों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देता है। रोग गंभीर होने पर ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है। आंतों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं – जैसे आंतों मेंं जलन, जख्म, सूजन, पीड़ा व आंत्र ज्वर।

उपचार

सेव : सेव खाने से आंतों के जख्म ठीक हो जाते हैं व सूजन मिट जाती है। सेव का रस पीने से आंतों के घावोंं में आराम मिलता है।

बेर : बेर ठंडा व रक्तशोधक फल है। इसके सेवन से आंतों के घाव ठीक हो जाते हैं।

संतरा : आंत के रोगियों को नित्य एक गिलास संतरे का रस पीना चाहिए।

चुकंदर व गाजर का रस : बड़ी आंत की सूजन में 185 ग्राम गाजर का रस 150 ग्राम चुकंदर का रस लगभग 160 ग्राम खीरे का रस मिलाकर पीने से काफी आराम मिलता है।

नारंगी : नारंगी गर्मी शांत करने वाली होती है। आंत्रज्वर के रोगी को दूध में नारंगी का रस मिलाकर पिलाएंं या फिर दूध पिलाकर नारंगी खिलाएं। दिन में कई बार नारंगी खिलाएं। इससे आंत्रज्वर मे काफी राहत मिलती है।

मौसमी : आंत्रज्वर मे मौसमी का सेवन लाभदायक होता है।

केला : आंत्रज्वर के रोगियों को केला काफी मात्रा में खाना चाहिए। इससे बहुत लाभ होता है। इससे आंतों की सूजन भी समाप्त हो जाती है।

अनार : अनार खाने से आंतों के विभिन्न रोगों में लाभ होता है।

बेल : पेट के भीतर की बड़ी आंतों में सूजन आ गई हो तो बेलपत्र का रस तथा बेलगिरी का हलवा साथ में लीजिए। पहले रस पी जाइए फिर पके हुए बेल का गूदा या हलवा खा जाइए। बेलपत्र का रस सूजन व घावों का इलाज करेगा तथा गुदे का हलवा सब कुछ पूर्ववत बना देगा।

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