सौफ के फायदे/ Anise Benefits in Hindi

सब्जियों और व्यंजनों को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए सौंफ का उपयोग किया जाता है हरी सौफ बहुत स्वादिष्ट और मधुर होती है पान में सौंफ का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है सौफ के पौधे 2 से 3 फीट ऊंचे होते हैं कई सारी जगहों पर सौंफ की खेती भी की जाती है सौफ के पौधे से भीनी भीनी मधुर सुगंध आती है पौधे पर धनिए की तरह बारीक पत्ते लगते हैं शौफ के पौधों पर लंबी वाले निकलती हैं फिर पीले रंग के फूल खिलते हैं पौधे परसों के दाने उठते हैं पहले2 सोच के दाने हरे रंग के होते हैं पक जाने पर इसका रंग कुछ पीला हो जाता है |

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सौंफ मुंह की दुर्गंध को नष्ट करती है सौंफ को सुखाकर सेवन करने से पित्त विकार, उदर, शूल, वायु गैस का विकास तीव्र प्यास नष्ट होती है| सौंफ रक्तपित्त को नष्ट करती है नेत्र रोग में सौंफ का अर्क पीने से लाभ होता है सौंफ का अर्क सेवन करने से मूत्र का अवरोध नष्ट होता है सौंफ के पत्ते भी बहुत गुणकारी होते हैं और विभिन्न रोग विकारों में बहुत लाभ पहुंचाते हैं इन पत्तों को पीसकर जल के साथ सेवन करने से स्तनों का विकास होता है सौंफ से निर्मित शरबत प्यास की तीव्रता को कम करता है यूनानी चिकित्सा से सौंफ का अर्क बहुत उपयोग किया जाता है इस अर्क के सेवन से कफ वात विकारों में बहुत लाभ होता है सौंफ के सेवन से अर्श रोग में बहुत लाभ होता है सौंफ का शरबत व अर्क पीने से नाक से रक्त स्त्राव नकसीर में बहुत लाभ होता है बुखार में तीव्र प्यास लगने पर जल में उबालकर छानकर या अर्क पीने से प्यास शांत होती है।

गुणकारी औषधीय उपयोग

1.सौंफ का अर्क 10 ग्राम मात्रा में मधु मिलाकर सेवन करने से खांसी का प्रकोप नष्ट होता है ।

2 .सौंफ को जल में उबालकर कपड़े द्वारा छानकर बच्चों को खिलाने से उदर के वायु विकार नष्ट होते हैं।

3.अधिक ऋतुस्त्राव होने पर सौंफ का सेवन करने से बहुत लाभ होता है |

4.गाजर के रस में हरी सौंफ का रस मिलाकर सेवन करने से रतौंधी रोग (रात में दिखाई नहीं देना ) नष्ट होता है और नेत्र ज्योति तीव्र होती है |

5.सौंफ का शरबत बनाकर ग्रीष्म ऋतु में सेवन करने से तीव्र उसदर्ता नष्ट होती है। शरीर को शीतलता प्रदान करने के साथ ही यह शरबत प्यास को शांत करता है|

6.सौंफ को जल में देर तक उबालकर क्लॉथ बनाएं इस क्लाथ को छानकर शर्करा मिलाकर सेवन करने से पित्त प्रकोप से उत्पन ज्वर नस्ट होता है |

7. सौंफ को कूटकर चूरमा बनाकर रखे 5 माशा चूणॅ हल्के गर्म जल के साथ सेवन करने से शीघ्र आध्मान (अफारा ) नस्ट होता है |

8. बुखार में वमन बिकृति होने पर सौफ का अर्क थोड़ी – थोड़ी देर में पिलाने से बहुत लाभ होता है |

9.यूनानी चिकित्सक गर्भस्य कि शुद्धि के लिए शौफ के पत्तों का कवाथ सेवन कर आते हैं इससे रक्त भी शुद्ध होता है और रक्त विकारों से सुरक्षा होती है ।

10.सौंफ के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से पाचन क्रिया तीव्र होती है और स्त्रियों के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

11. 100 ग्राम सौंफ और नींबू के रस में मिलाकर सीसी में भरकर रखें इस सौंफ को भोजन के बाद थोड़ा-थोड़ा खाने से पाचन क्रिया तीव्र होती है और पेट का भारीपन तथा बेचैनी नष्ट होती है।

12.सौंफ को जल में उबालकर कलोथ बनाएं |कलोथ को छानकर , दूध में मिलाकर पीने से अनिद्रा नींद नहीं आने की विकृति नष्ट होती है ।

13.बेल का गूदा और सौंफ चबाकर खाने से अजीण विकार शीघ्र नष्ट होते हैं।

14.सौंफ का अर्क 10 ग्राम मात्रा में लेकर उसमें मधु मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से खांसी रोग नष्ट होता है।

15.दूध में सौंफ को उबालकर दूध को छानकर शिशु को पिलाने से उनके दांत सरलता से निकलते हैं और अतिसार की विकृति से भी सुरक्षा होती है।

 

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