अग्निदाह से उत्पन्न दर्द के कारण, लक्षण और उपचार : Agnidaha Se Utpann Dard Ke Karan Lakshan Aur Upchar

कारण व लक्षण

आग से जलने पर त्वचा में दाह उत्पन्न हो जाता है। यदि त्वचा ज्यादा न जली हो तो फफोले हो जाते हैं जबकि ज्यादा जलने पर घाव हो जाता है, जिसमें तीव्र जलन होती है। त्वचा में फफोले हो जाने पर उनमे मवाद पड़ जाता है व बदबूदार स्त्राव होने लगता है।

उपचार

आम : आम से शरीर का कोई अंग जल जाए तो आम के पत्ते को जलाकर उनकी भस्म को जले हुए पर बुरकिए। जला हुआ अंग ठीक हो जाएगा।

गाजर : कच्ची गाजर को पीसकर आग से जले हुए अंग या स्थान पर मरहम की तरह लेप करने से दाह मिट जाता है। साथ ही दाह के परिणाम स्वरुप त्वचा में बनने वाला पीप बनना भी बंद हो जाता है।

केला : आग में जल जाने पर जले हुए स्थान पर खूब पके केले के गूदे को फेंटकर मरहम की तरह लगा दें। इससे तुरंत ठंडक मिलता है व दाह शांत हो जाता है।

नारियल : आग से जले हुए स्थान पर तुरंत ही चुने का निथरा हुआ पानी और नारियल का तेल समान मात्रा में मिलाकर लगाने से जलन तत्काल शांत हो जाता है तथा फफोले इत्यादि भी नहीं पड़ते। इस उपचार को दिन में दो बार अवश्य करें।

बेल : आग में जलने पर बेल की कचरियों का चूर्ण बनाकर उसे गर्म तेल में मिलाकर ठंडा होने पर घाव पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है। यह बहुत कारगर नुस्खा है। एक बार के प्रयोग से ही आप इसका लोहा मान जाएंगे।

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