अडूसा के फायदे / Adusha Benefits in Hindi

 

अडूसा खाने मैं जितना स्वादिष्ट लगता है,उसके खाने और रस के सेवन से उतने ही अधिक गुणकारी तत्व शरीर को मिलते हैं। अडूसा पौस्टिक होने के साथ ही शरीर की निर्बलता को नष्ट करके रक्तवृद्धि करता है और अनेक रोग विकारों को नष्ट करता है। अडूसा के सेवन से स्वास व काश (खांसी) के प्रकोप में बहुत लाभ होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अडूसा  मूत्रावरोध, वात विकृति से उत्पन्न रक्त प्रदर (ल्यूकोरिया ), सुष्क कास (खासी), रक्तपित्त (नाक व मुंह से रक्त निकलने पर) शोथ (सूजन) ,नेत्र रोग , अम्लपित्त और वमन आदि रोग विकारों में बहुत लाभ पहुंचाता है।डॉक्टरों के अनुसार अडूसे को (टी. वी.) में बहुत गुणकारी मानते हैं अडूसे के रस के सेवन से उष्णता नष्ट होती है।

ग्रीष्म ऋतु में अडूसे का शर्बत पीने से भीषण उष्णता और तीब्र प्यास का निवारण होता है अडूसा के पत्ते फूल और छाल भी विभिन्नन रोग विकारों में बहुत लाभ पहुंचाते है।

गुणकारी औषधीय उपयोग

1. अडूसे का रस खांसी की सबसे गुणकारी औषधि है स्वादिष्ट होने के कारण सभी छोटे-बड़े व्यक्ति बहुत रुचि से इसका सेवन करते हैं।

2. अडूसा के पत्तों का रस 20 ग्राम मात्रा में पिलाने से आंत्र क्रर्मि बहुत जल्दी नष्ट होते हैं।

3. खाटू से के रस का सुबह-शाम कुछ सप्ताह सेवन करने से रक्त पित्त की विकृत नष्ट होती है।

4. खेलने कूदने से बच्चों की नाक से रक्त स्त्राव होने पर दूसरे के रस का सेवन कराने से बहुत लाभ होता है।

5. अडूसा के पत्तों का रस 15 से 20 ग्राम मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने वॉछस्थल में एकत्र कफ यानी की बलगम निष्कासित होता है।

6. अडूसा के पत्तों को जल में उबालकर छानकर पिलाने से खांसी की विकृति नष्ट होती है और कब भी सरलता से निकल जाता है|

7. अडूसा के फूलों को रात्रि में जल में डालकर रखें प्रातः उठकर उन फूलों को मसल कर उस जल को छानकर पीने से मूत्र का अवरोध नष्ट होने के साथ ही जलन का भी निवारण होता है।

8.अडूसा के ताजे कोमल पत्तों का रस निकालकर 10 मिलीमीटर मात्रा में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से रक्त स्त्राव में अधिक रक्त स्त्राव की विकृति नष्ट होती है।

9.अडूसा के रस में मधु मिलाकर दिन में चार-पांच बार चटाने से अस्थमा रोगी का कफ सरलता से निकल जाता है।

10.अडूसे के रस में मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से स्त्रियों के रक्त व श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है मूत्राघात की विकृत नष्ट होती है।

11.अडूसा के फूलों को छाया में सुखाकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर रखें इस चूर्ण में गुड़ मिलाकर सेवन करने से सिर दर्द में बहुत लाभ होता है

 

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